नोएडा के सेक्टर-34 में रहने वाली एक महिला को 12 फरवरी को व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को साइबर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। आरोपी ने महिला पर जांच में सहयोग करने का दबाव बनाया और गिरफ्तारी की धमकी दी।
फर्जी वीडियो कॉल और “डिजिटल अरेस्ट”
कुछ ही देर में ऑडियो कॉल वीडियो कॉल में बदल गई, जिसमें कथित “पुलिस अधिकारी” वर्दी में बैठे दिखाई दिए। महिला को एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया गया और करीब 8 घंटे तक कमरे में रहने के लिए मजबूर किया गया।
इसके बाद:
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महिला को “डिजिटल अरेस्ट” में बताया गया
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फर्जी कोर्ट की सुनवाई कराई गई
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बैंक खाते की रकम “वेरिफिकेशन” के नाम पर ट्रांसफर करने को कहा गया
डर के कारण महिला ने 13 फरवरी को आरटीजीएस और नेट बैंकिंग के जरिए 5 ट्रांजैक्शन में कुल 8.52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ठगी का खुलासा कैसे हुआ
ठगों ने महिला को भरोसा दिलाया कि वेरिफिकेशन के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। लेकिन ट्रांजैक्शन के बाद:
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कॉल कट गई
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दोबारा संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला
तब महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं। उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम?
यह एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग:
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खुद को पुलिस/सरकारी अधिकारी बताते हैं
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वीडियो कॉल पर नकली माहौल बनाकर डराते हैं
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गिरफ्तारी या केस का डर दिखाकर पैसे ऐंठते हैं
असल में कोई भी पुलिस या एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं करती।
कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से
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अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें
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पुलिस या सरकारी एजेंसी कभी फोन पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती
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वीडियो कॉल पर दिख रहे “अधिकारियों” पर तुरंत भरोसा न करें
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डराने या दबाव बनाने पर तुरंत कॉल काट दें
किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।