देश के को-ऑपरेटिव बैंकों से 60–80 करोड़ रुपये उड़ाने की थी साजिश, दो विदेशी नागरिक गिरफ्तार
गुजरात के बैंक से 7 करोड़ की ठगी कर चुके थे आरोपी
Mediawali news
नोएडा की साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम थाना, नॉलेज पार्क थाना और मेरठ ज़ोन की साइबर कमांडो टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि यह गिरोह को-ऑपरेटिव बैंकों की सुरक्षा की कर्मियों का फायदा उठाकर 60–80 करोड़ रुपये उड़ाने की साजिश रच रहा था। आरोपी गुजरात के बैंक से 7 करोड़ की ठगी कर चुके थे। मामले में पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि गोपनीय इंटेलिजेंस इनपुट मिला था कि सोलर स्पाइडर नाम के एक साइबर थ्रेट एक्टर से जुड़ा मॉड्यूल दोबारा सक्रिय हो गया है। सूचना मिलते ही साइबर क्राइम टीम ने तेजी से जांच शुरू की और तकनीकी निगरानी के जरिए इस गिरोह तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि यह गैंग खास तौर पर को-ऑपरेटिव बैंकों को निशाना बनाता था। आरोपी बैंक के सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों (वल्नरेबिलिटी) का फायदा उठाकर बड़ी रकम को म्यूल खातों में ट्रांसफर करने की योजना बना रहे थे। इसके बाद यह पैसा क्रिप्टो करेंसी के जरिए देश से बाहर भेज दिया जाता था, जिससे उसका पता लगाना मुश्किल हो जाता। पुलिस के मुताबिक आरोपियों की योजना करीब 60 से 80 करोड़ रुपये की ठगी करने की थी। लेकिन समय रहते कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस पूरे मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया और दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी पहले ही एक बड़ी वारदात को अंजाम दे चुके हैं। उन्होंने 7 से 8 मार्च के वीकेंड पर गुजरात के एक को-ऑपरेटिव बैंक से करीब 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर ली थी। आरोपी जानबूझकर ऐसे ट्रांजेक्शन वीकेंड में करते थे, क्योंकि उस समय बैंक बंद रहते हैं और बैंक या ग्राहकों को धोखाधड़ी का पता देर से चलता है।
नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम ने तुरंत Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और संबंधित बैंकों को सूचना दी। समय रहते अलर्ट जारी होने के कारण आगे होने वाली कई करोड़ रुपये की संभावित ठगी को रोका जा सका। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। इनके संपर्क नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में सक्रिय साइबर अपराधियों से भी बताए जा रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि इसी थ्रेट एक्टर से जुड़े एक अन्य मॉड्यूल को 2025 में भी गौतमबुद्धनगर पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
ऐसे करते थे साइबर फ्रॉड
को-ऑपरेटिव बैंकों के सिस्टम की कमजोरियों को खोजते थे
बैंक अकाउंट से पैसे निकालकर म्यूल खातों में ट्रांसफर करते थे
वीकेंड में ट्रांजेक्शन करते थे ताकि तुरंत पता न चले
बाद में पैसे को क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेश भेज देते थे
पुलिस ने इस मामले को देखते हुए सभी को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें बैंकों को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करने, सिस्टम की नियमित जांच करने और निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाने की सलाह दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की आगे भी गहराई से जांच की जा रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।