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1 अप्रैल 2026 को सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी दर्ज की गई है। India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोना ₹2,836 महंगा होकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो एक बड़ा स्तर माना जा रहा है। वहीं चांदी की कीमत में भी जोरदार उछाल देखने को मिला है और यह ₹9,348 बढ़कर ₹2.39 लाख प्रति किलो हो गई है।
इस साल ₹16 हजार से ज्यादा महंगा हुआ सोना
साल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में कुल ₹16,374 की बढ़ोतरी हो चुकी है। हालांकि इस दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। 29 जनवरी को सोना ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया था। इसके बाद Iran–Israel–US conflict 2026 के चलते बाजार में गिरावट आई और सोने की कीमत करीब ₹9,528 तक नीचे आ गई। चांदी में भी इसी तरह की अस्थिरता रही और यह अपने हाई से काफी नीचे आई।
क्यों बढ़ते हैं अलग-अलग शहरों में दाम?
सोने-चांदी की कीमतें हर शहर में एक जैसी नहीं होतीं। इसके पीछे कई कारण होते हैं।
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ट्रांसपोर्ट और सिक्योरिटी लागत: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है।
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डिमांड-सप्लाई: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत होने के कारण वहां कीमतों में फर्क देखा जाता है।
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लोकल ज्वेलर्स एसोसिएशन: स्थानीय स्तर पर मांग और स्टॉक के आधार पर रेट तय किए जाते हैं।
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पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक की खरीद कीमत भी रेट तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोना खरीदते समय सावधानी बेहद जरूरी है।
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हॉलमार्क जरूर देखें: हमेशा Bureau of Indian Standards (BIS) का हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता सुनिश्चित होती है।
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रेट क्रॉस चेक करें: खरीदारी से पहले अलग-अलग स्रोतों से सोने की कीमत जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के रेट अलग होते हैं।
असली चांदी पहचानने के आसान तरीके
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता जांचना भी जरूरी है।
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मैग्नेट टेस्ट: असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती।
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आइस टेस्ट: असली चांदी पर बर्फ जल्दी पिघलती है।
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स्मेल टेस्ट: असली चांदी में कोई गंध नहीं होती।
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क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आना असली चांदी की पहचान है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोने-चांदी की कीमतों में यह तेजी वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल का असर दिखाती है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह सुरक्षित निवेश का संकेत हो सकता है, लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करना जरूरी है।