ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग सिस्टम की तैयारी, टैक्स भरना होगा पहले से ज्यादा आसान

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बड़े टैक्सपेयर्स को सबसे पहले मिलेगी सुविधा, AI से घटेगा मैनुअल काम

नई दिल्ली। भारत में टैक्स सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। आने वाले समय में देश के बड़े टैक्सपेयर्स को Fully Automated Tax Filing और Compliance System की सुविधा मिल सकती है। इससे टैक्स रिटर्न भरने से लेकर कंप्लायंस और नोटिस ट्रैकिंग तक की प्रक्रिया काफी हद तक अपने आप हो जाएगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार अपने टैक्स पोर्टल्स के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) को थर्ड पार्टी टेक्नोलॉजी कंपनियों और कंसल्टिंग फर्म्स के लिए खोल रही है। इससे टैक्स फाइलिंग और उससे जुड़े कामों को सीधे सरकारी सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा।

किन लोगों को पहले मिलेगी सुविधा

शुरुआती चरण में इस ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग सिस्टम का लाभ बड़े टैक्सपेयर्स को मिलने की संभावना है। इसमें शामिल हैं—

  • कॉर्पोरेट कंपनियां

  • मल्टीनेशनल कंपनियां (MNCs)

  • विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs)

  • बड़े बिजनेस हाउस

इन टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स कंप्लायंस ज्यादा जटिल होता है, ऐसे में यह सिस्टम उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

GST के बाद इनकम टैक्स पर फोकस

रिपोर्ट के अनुसार, GST सिस्टम के लिए API एक्सेस पहले ही दिया जा चुका है। अब सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) और कस्टम्स के तहत आने वाले डायरेक्ट टैक्स सिस्टम के लिए भी इसी तरह का API एक्सेस दिए जाने की तैयारी है। इससे इनकम टैक्स, कस्टम्स और अन्य डायरेक्ट टैक्स प्रक्रियाएं भी ऑटोमेटेड हो सकेंगी।

AI से बदलेगा टैक्स कंप्लायंस का तरीका

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि API एक्सेस मिलने के बाद कंसल्टिंग फर्म और टेक्नोलॉजी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स विकसित कर सकेंगी। इन टूल्स की मदद से—

  • टैक्स फाइलिंग ऑटोमैटिक होगी

  • नोटिस और अपील ट्रैक करना आसान होगा

  • मैनुअल एंट्री और इंसानी दखल काफी कम हो जाएगा

अभी कहां आती है दिक्कत

फिलहाल बड़ी कंपनियों को GST, इनकम टैक्स और कस्टम्स से जुड़े कामों के लिए कई सरकारी पोर्टल्स पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि रिटर्न ऑनलाइन फाइल हो जाते हैं, लेकिन अपील, नोटिस और केस ट्रैकिंग जैसे कामों में अब भी मैनुअल जांच करनी पड़ती है।

सरकार का लक्ष्य

इस पूरे कदम का मकसद टैक्स सिस्टम को एकीकृत, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाना है। एक जानकार के अनुसार, सरकार द्वारा जारी किए गए API टैक्स कंप्लायंस को एक आसान और स्मार्ट प्रक्रिया में बदल सकते हैं, जिससे समय, लागत और विवाद—तीनों में कमी आएगी।

अगर यह सिस्टम सफल रहा, तो आने वाले समय में आम टैक्सपेयर्स को भी इसका फायदा मिल सकता है और भारत का टैक्स ढांचा पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर जाएगा।

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