228 करोड़ बैंक धोखाधड़ी केस में अनिल अंबानी के बेटे से पूछताछ, जांच का दायरा बढ़ने के संकेत
Mediawali news
देश के बड़े उद्योगपति परिवार से जुड़े एक बैंक धोखाधड़ी मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने 228 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में उद्योगपति जय अनमोल अंबानी से पूछताछ की है। अधिकारियों के अनुसार उनसे पूछताछ का सिलसिला अभी जारी रह सकता है और उन्हें दोबारा भी जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है।
यह मामला Union Bank of India (तत्कालीन Andhra Bank) की शिकायत से जुड़ा है। बैंक ने आरोप लगाया था कि एक कंपनी ने उससे लिया गया कर्ज समय पर वापस नहीं किया। इसके बाद 2019 में यह खाता एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित हो गया। बाद में अक्टूबर 2024 में बैंक ने इसे आधिकारिक रूप से फ्रॉड अकाउंट भी घोषित कर दिया।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला Reliance Housing Finance Limited से जुड़ा हुआ है। इस केस में कंपनी के पूर्व सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक रवींद्र सुधाकर समेत कई लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई ने 9 दिसंबर 2025 को इस संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। उसी के बाद जांच के तहत जय अनमोल अंबानी के घर पर भी तलाशी ली गई थी।
हालांकि जांच केवल एक बैंक तक सीमित नहीं रह सकती। एजेंसी के मुताबिक रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस पर 18 बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कंसोर्टियम का कुल करीब 5,572 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है। इसलिए संभावना है कि जांच आगे और बड़े दायरे में बढ़ सकती है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह उद्योगपति अनिल अंबानी के परिवार से जुड़ा है। कभी देश के सबसे अमीर कारोबारियों में गिने जाने वाले अनिल अंबानी पिछले कुछ वर्षों से भारी कर्ज और वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। खुद अनिल अंबानी पहले यह कह चुके हैं कि उनकी नेटवर्थ लगभग शून्य हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी का नहीं, बल्कि भारत के बैंकिंग सिस्टम में बड़े कॉर्पोरेट लोन और उनके जोखिम से जुड़ा मुद्दा भी है। पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े कर्ज मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय हुई हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं बैंकिंग नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
फिलहाल सीबीआई की पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो यह केस भारत के बड़े कॉर्पोरेट लोन मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।