18 साल बाद ऐतिहासिक करार: भारत-EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर लगी मुहर

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नई दिल्ली में साइन हुआ मेगा FTA


भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 साल की लंबी बातचीत के बाद आखिरकार ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) साइन हो गया है। इस समझौते को नई दिल्ली में अंतिम रूप दिया गया, जिसे दोनों पक्षों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि माना जा रहा है।

पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील’


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के उद्घाटन समारोह में इस समझौते की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत-EU डील को दुनिया में “मदर ऑफ ऑल डील” कहा जा रहा है, क्योंकि यह दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ एक ऐतिहासिक करार है।

140 करोड़ भारतीयों के लिए नए अवसर


पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों के करोड़ों नागरिकों के लिए रोजगार, निवेश और व्यापार के नए अवसर लेकर आएगा। यह डील केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि डेमोक्रेसी और रूल ऑफ लॉ के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

ग्लोबल इकोनॉमी में बड़ी हिस्सेदारी


प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत-EU FTA ग्लोबल GDP के करीब 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।

रिफाइनिंग सेक्टर में निवेश का सुनहरा मौका



पीएम मोदी ने बताया कि भारत रिफाइनिंग कैपेसिटी में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और जल्द ही पहले स्थान पर पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत की रिफाइनिंग क्षमता 260 MMTPA है, जिसे 300 MMTPA तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने इसे निवेशकों के लिए बड़ा अवसर बताया।

2007 से चल रही थी बातचीत


गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA पर बातचीत वर्ष 2007 से जारी थी। लंबे इंतजार के बाद 18 साल में इस समझौते को अंतिम मंजूरी मिली है। यूरोपीय संघ की ओर से यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने इस डील को हरी झंडी दी।

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