एग्रीगेटर कंपनियों पर सरकार की सख्ती, ओला-उबर समेत ऐप आधारित सेवाओं की गाइडलाइन में होंगे बड़े बदलाव
शहर में ऐप आधारित परिवहन सेवाएं देने वाली एग्रीगेटर कंपनियों पर अब सरकार नकेल कसने की तैयारी में है। ओला, उबर और अन्य कैब एग्रीगेटर कंपनियों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। यात्रियों की सुरक्षा, किराए की पारदर्शिता, ड्राइवरों के व्यवहार और नियमों के उल्लंघन जैसे मुद्दों को देखते हुए सरकार ने मौजूदा एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) और गाइडलाइनों में बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है।
अहम बैठक में लिया गया निर्णय
हाल ही में परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि मौजूदा नियम तेजी से बढ़ रही एग्रीगेटर सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए अब पर्याप्त नहीं हैं। अधिकारियों ने माना कि शहर में कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं की संख्या बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों से जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं। ऐसे में इन कंपनियों की फ्लीट, ड्राइवरों और संचालन व्यवस्था पर कड़ी निगरानी जरूरी हो गई है।
एक महीने में नई गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश
बैठक में यह तय किया गया कि संबंधित विभागों को एक महीने के भीतर नई और अपडेटेड गाइडलाइन तैयार करनी होगी। इन गाइडलाइनों में यह साफ किया जाएगा कि ओला, उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियां किन शर्तों पर सेवाएं दे सकेंगी। इसमें ड्राइवरों के लिए नियम, गाड़ियों की फिटनेस, बीमा, परमिट और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को और सख्त किया जाएगा।
ड्राइवर वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग पर फोकस
नई गाइडलाइन में ड्राइवरों के पुलिस सत्यापन, नियमित ट्रेनिंग, व्यवहार और सुरक्षा मानकों को प्रमुखता दी जाएगी। इसके अलावा, यात्रियों की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए कंपनियों को मजबूत ग्रेविएंस रिड्रेसल सिस्टम लागू करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। किराए में पारदर्शिता और ऐप पर दिखाए जाने वाले चार्ज को लेकर भी नियम स्पष्ट किए जाएंगे।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि नई गाइडलाइन लागू होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों या ड्राइवरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना, ड्राइवर का लाइसेंस रद्द करना या संबंधित कंपनी की सेवाओं पर रोक लगाने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। गाइडलाइन तैयार होने के बाद इसकी रिपोर्ट परिवहन विभाग को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा देना लक्ष्य
सरकार का कहना है कि इस पूरे कदम का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और पारदर्शी परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि एग्रीगेटर कंपनियां मनमानी न करें और तय नियमों के दायरे में रहकर ही काम करें। आने वाले समय में इन नए नियमों के लागू होने से ओला, उबर और अन्य ऐप आधारित सेवाओं के संचालन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसका सीधा असर यात्रियों और ड्राइवरों दोनों पर पड़ेगा।