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भारत‑फ्रांस राफेल डील: ‘मेक इन इंडिया’ के लिए जोर, अधिकतम स्वदेशी हिस्से की मांग

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फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील पर बातचीत तेज

 भारत सरकार ने फ्रांस के साथ प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील में अधिकतम स्थानीय सामग्री (Local Content) शामिल करने की जोरदार मांग रखी है। भारत का स्पष्ट रुख है कि जो विमान देश में तैयार होंगे, उनमें कम से कम 50 प्रतिशत से अधिक सामग्री भारत में निर्मित होनी चाहिए। इससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति मिलेगी।

यह मुद्दा हाल ही में हुई भारत-फ्रांस रक्षा संवाद बैठक में प्रमुखता से उठाया गया, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की मंत्री कैथरीन वाट्रिन शामिल थीं।

96 राफेल भारत में बनेंगे, शुरुआती विमान फ्रांस से आएंगे

प्रस्तावित योजना के अनुसार, कुल 114 राफेल विमानों में से लगभग 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। शुरुआत में कुछ विमानों को फ्रांस से फ्लाई-अवे कंडीशन में लाया जाएगा, ताकि भारतीय वायु सेना की जरूरतें तुरंत पूरी हो सकें। इसके बाद उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत में स्थापित विनिर्माण इकाइयों में किया जाएगा।

यह मॉडल भारत के लिए तकनीकी हस्तांतरण और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।

भारतीय हथियार और स्वदेशी तकनीक शामिल करने पर जोर

भारत ने यह भी मांग रखी है कि राफेल विमानों में भारतीय हथियार प्रणालियों और भारत-विशिष्ट तकनीकी आवश्यकताओं को आसानी से जोड़ा जा सके। इससे डीआरडीओ और घरेलू रक्षा कंपनियों को बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स में भागीदारी का मौका मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को भविष्य में स्वदेशी लड़ाकू विमानों और उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास में मजबूत बनाएगा।

देश में ही MRO सुविधाएं विकसित करने की योजना

भारत ने विमानों के रख-रखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं देश में ही विकसित करने की मांग भी उठाई है। इससे विमानों की सर्विसिंग के लिए विदेशी निर्भरता कम होगी और लागत में भी कमी आएगी।

रक्षा उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील केवल वायु सेना की ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। स्थानीय उत्पादन से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, तकनीकी कौशल विकसित होंगे और भारत की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।

रणनीतिक साझेदारी में नया अध्याय

भारत-फ्रांस राफेल डील अब सिर्फ विमान खरीद का सौदा नहीं रह गई है, बल्कि यह स्वदेशी रक्षा उत्पादन और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम बन चुकी है। अधिकतम स्थानीय सामग्री की मांग के साथ भारत अपने सुरक्षा हितों और औद्योगिक विकास दोनों को प्राथमिकता दे रहा है।

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