बिल्हौर इंटर कॉलेज में 13 छात्रों का भविष्य अधर में, बोर्ड परीक्षा से पहले प्रवेश पत्र पर संकट
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कानपुर/बिल्हौर। यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होने में अब महज एक दिन शेष है, लेकिन बिल्हौर स्थित बिल्हौर इंटर कॉलेज के 13 इंटरमीडिएट छात्र-छात्राओं का भविष्य असमंजस में फंसा हुआ है। प्रवेश पत्र और विषय परिवर्तन को लेकर चल रहे विवाद ने परीक्षा से ठीक पहले छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
छात्रों का आरोप है कि वे पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं और समय-समय पर फीस भी जमा की गई है। इसके बावजूद अब उन्हें कॉलेज का छात्र मानने से इनकार किया जा रहा है। छात्रा शिवानी, पायल, सुमेरा यासमीन, कोमल और बंदना का कहना है कि पिछले दो महीनों से उन्हें एनटीटी का छात्र बताकर कक्षा में बैठने से रोका जा रहा है।
डीआईओएस कार्यालय में शिकायत
परेशान छात्र-छात्राओं ने डीआईओएस कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि परीक्षा सिर पर है, लेकिन अब तक न तो प्रवेश पत्र मिले हैं और न ही विषय की स्थिति स्पष्ट हुई है। छात्रा काजल ने बताया कि घर पर भी उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
विषय परिवर्तन के बाद भी जारी हुआ एनटीटी का प्रवेश पत्र
13 में से चार छात्रों—खुर्शीद आलम, उजैर, अदनान और कदीर—का कहना है कि शिक्षकों के कहने पर उन्होंने एनटीटी से विषय बदलकर अकाउंटेंट में प्रवेश लिया था और उसी विषय की पढ़ाई कर रहे थे। इसके बावजूद बोर्ड की ओर से उनका प्रवेश पत्र एनटीटी विषय का जारी कर दिया गया, जिससे परीक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
प्रबंधन और प्रधानाचार्य का पक्ष
कॉलेज प्रबंधक प्रभाकर श्रीवास्तव का कहना है कि दिसंबर 2024 में यूपी बोर्ड का पासवर्ड हैक हो गया था, जिसके चलते केवल चार छात्रों का ही एनटीटी में वैध प्रवेश संभव हो सका। शेष नौ छात्रों को उन्होंने कॉलेज का छात्र मानने से इनकार किया है। साथ ही गेस्ट टीचर चित्रांशी पर गलत तरीके से कक्षा 11 के अंकपत्र जारी करने का आरोप लगाया है।
वहीं प्रधानाचार्य सुरजीत सिंह यादव का कहना है कि एनटीटी में प्रवेश लेने वाले चार छात्रों ने अर्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा नहीं दी थी, इसलिए 2025 में एनटीटी की कक्षाएं संचालित नहीं हुईं। शेष नौ छात्र विद्यालय के नहीं हैं। उन्होंने बताया कि डीआईओएस द्वारा गठित जांच टीम अपनी रिपोर्ट भेज चुकी है।