अमेरिका-यूरोप से आगे चिली डील पर भारत की नजर, ग्रीन एनर्जी और EV सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

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Mediawali News
अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ भारत की हालिया ट्रेड डील्स को लेकर काफी शोर रहा, लेकिन एक कम चर्चित समझौता भविष्य में कहीं ज्यादा असर डाल सकता है। दक्षिण अमेरिकी देश चिली के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अब भारत की ग्रीन अर्थव्यवस्था और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रहा है। 2030 तक बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और सोलर-पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इन दोनों सेक्टर की रीढ़ हैं-लिथियम, कॉपर, कोबाल्ट और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स। चिली दुनिया के सबसे बड़े लिथियम उत्पादक देशों में गिना जाता है। ऐसे में भारत के लिए यह साझेदारी केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा कदम है।

अब तक इन खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा रहा है। भारत अपनी बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के कारण काफी हद तक आयात पर निर्भर है। यदि चिली के साथ सीधा और दीर्घकालिक समझौता होता है, तो भारत को बैटरी निर्माण, सेमीकंडक्टर, सोलर पैनल और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्थिर और विविध स्रोत मिल सकते हैं।

इस डील का एक और अहम पहलू है- निजी निवेश और संयुक्त उद्यम। संभावना है कि भारतीय कंपनियां चिली में खनन और प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश करें, जिससे कच्चे माल की सप्लाई पर दीर्घकालिक पकड़ बनाई जा सके। इससे भारत में बैटरी गीगाफैक्ट्री और EV मैन्युफैक्चरिंग को भी रफ्तार मिल सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा केवल बाजार हिस्सेदारी की नहीं, बल्कि संसाधनों की होगी। ऐसे में चिली के साथ समझौता भारत को ग्रीन टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी बना सकता है।

इस तरह, जहां अमेरिका और यूरोप के साथ डील्स बाजार और निवेश के लिहाज से अहम हैं, वहीं चिली के साथ संभावित समझौता भारत की ऊर्जा, तकनीक और औद्योगिक भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

Anjali Priya
Anjali Priya
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