Gold Silver Price: चांदी में ₹17,000 की बड़ी तेजी, सोना ₹1.58 लाख के पार; जानें उछाल के पीछे की वजह
नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। वैश्विक बाजारों में तेजी और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के चलते कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है, जिससे घरेलू बाजार में भी दाम आसमान छूते नजर आए।
चांदी ₹2.72 लाख प्रति किलो, एक दिन में ₹17,000 का उछाल
सोमवार को चांदी की कीमत 6.66 प्रतिशत बढ़कर ₹2.72 लाख प्रति किलोग्राम पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ₹2.55 लाख प्रति किलो पर बंद हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में तेजी और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते चांदी में भारी उछाल देखा गया।
सोना भी ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम के पार
99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में भी ₹1,300 की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया। शुक्रवार को सोना ₹1.57 लाख पर बंद हुआ था।
वैश्विक बाजारों से मिली घरेलू बाजार को रफ्तार
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 2.81 प्रतिशत बढ़कर 80.21 डॉलर प्रति औंस और सोना 1 प्रतिशत बढ़कर 5,012.94 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा।
डॉलर में कमजोरी और ट्रंप की नीतियों का असर
कीमती धातुओं में तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी है। डॉलर इंडेक्स 0.30 प्रतिशत गिरकर 97 के स्तर पर आ गया है, जिससे बुलियन कीमतों को समर्थन मिला। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ और भू-राजनीतिक नीतियों को लेकर बयानबाजी ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे निवेशक सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
चीन की खरीदारी से मजबूत हुआ बाजार सेंटीमेंट
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने जनवरी में लगातार 15वें महीने सोने की खरीदारी जारी रखी है। केंद्रीय बैंक द्वारा सोने का भंडार बढ़ाना वैश्विक निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जिससे बाजार में तेजी का माहौल बना।
आगे अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में अमेरिकी रोजगार और मुद्रास्फीति के आंकड़े सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से कम या ज्यादा आते हैं, तो फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति में बदलाव संभव है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ेगा।