US-India ट्रेड डील के बाद आगे क्या? जयशंकर–रूबियो बैठक तय करेगी रिश्तों का रोडमैप

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 नई दिल्ली।
भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नई दिशा तय होने जा रही है। बुधवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच होने वाली अहम बैठक को इसी कड़ी में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मुलाकात न सिर्फ द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का रोडमैप तय करेगी, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर भी असर डालेगी।

द्विपक्षीय सहयोग और ट्रेड डील पर चर्चा

यह बैठक भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह करीब दो बजे होगी। इसमें दोनों नेता हालिया ट्रेड डील के बाद आगे के सहयोग के क्षेत्रों पर विस्तृत बातचीत करेंगे। पिछले 9–10 महीनों में उच्च टैरिफ और कारोबारी गतिरोध के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में आई असहजता को दूर करने पर विशेष फोकस रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, ट्रेड और निवेश से जुड़ी अनिश्चितताओं को खत्म करना इस बैठक की प्राथमिकता होगी।

क्वाड शिखर सम्मेलन और वीजा मुद्दा

बैठक में भारत में प्रस्तावित क्वाड शिखर सम्मेलन की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। साथ ही, भारतीय उच्च शिक्षित पेशेवरों के लिए अमेरिकी वीजा प्रक्रिया में हाल के बदलावों का मुद्दा जयशंकर द्वारा उठाया जाएगा, जिसे भारत लंबे समय से अहम मानता रहा है।

क्रिटिकल मिनरल्स, एआई और सेमीकंडक्टर सहयोग

इस महीने ट्रंप प्रशासन का एक मजबूत प्रतिनिधिमंडल भारत आने वाला है, जिसमें उप वाणिज्य सचिव जेफरी केसलर भी शामिल हैं। भारत में होने वाले एआई इम्पैक्ट सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में सहयोग को लेकर बातचीत होगी। बुधवार को रूबियो की अध्यक्षता में क्रिटिकल मिनरल्स पर होने वाली बैठक में जयशंकर भी हिस्सा लेंगे।

पाकिस्तान और चीन की बढ़ती चिंता

ट्रेड डील और रणनीतिक सहयोग के बाद पाकिस्तान और चीन की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है। खास बात यह है कि क्रिटिकल मिनरल्स की अहम बैठक में पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है, जिसे भारत की संवेदनशीलताओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।

रिश्तों में लौटेगी पुरानी गर्मजोशी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में आई ठंडक खत्म हो सकती है। ट्रेड डील पर सहमति और रणनीतिक सहयोग से दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फिर गर्मजोशी लौटने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

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