2035 तक भारत बनेगा एडवांस मैन्युफैक्चरिंग हब, GDP में योगदान 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य: NITI Aayog

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AI, रोबोटिक्स और डिजिटल ट्विन्स से बदलेगा देश का औद्योगिक भविष्य

सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग (NITI Aayog) ने बुधवार को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग पर एक अहम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत को वर्ष 2035 तक वैश्विक एडवांस मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने का विस्तृत रोडमैप पेश किया गया है। नीति आयोग का दावा है कि यदि भारत उन्नत तकनीकों को समय पर अपनाता है, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान देश की GDP में बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच सकता है और 10 करोड़ से ज्यादा उच्च-कौशल वाली नौकरियां पैदा होंगी।

‘Reimagining Manufacturing’ रिपोर्ट में क्या कहा गया

‘Reimagining Manufacturing: India’s Roadmap to Global Leadership in Advanced Manufacturing’ नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डिजिटल ट्विन्स, एडवांस मैटेरियल्स और रोबोटिक्स जैसी फ्रंटियर टेक्नोलॉजी भारत की औद्योगिक व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में एक मजबूत आधार बनेगी।

फिलहाल भारत की GDP में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान करीब 15 से 17 प्रतिशत के बीच है। नीति आयोग का मानना है कि सही नीतियों और तकनीकी निवेश के जरिए अगले दस वर्षों में इसे 25 प्रतिशत तक ले जाया जा सकता है।

10 करोड़ से ज्यादा रोजगार का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो देश में 10 करोड़ से अधिक नई नौकरियां पैदा होंगी। इनमें से अधिकतर नौकरियां उच्च-कौशल, तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी होंगी। इससे न सिर्फ युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि भारत की आर्थिक विकास दर भी तेज होगी।

चार प्रमुख टेक्नोलॉजी पर फोकस

नीति आयोग की रिपोर्ट में चार प्रमुख फ्रंटियर टेक्नोलॉजी को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

  • डिजिटल ट्विन्स

  • एडवांस मैटेरियल्स

  • रोबोटिक्स

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत इन तकनीकों को समय पर नहीं अपनाता है, तो 2035 तक करीब 270 अरब डॉलर और 2047 तक लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर के अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का नुकसान हो सकता है।

वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य

नीति आयोग ने 2035 के लिए छह बड़े लक्ष्य तय किए हैं। इनमें उत्पादकता में हर साल 3.5 प्रतिशत की वृद्धि, वैश्विक निर्यात में 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी, कम से कम 60 भारतीय ग्लोबल ब्रांड तैयार करना और छह राज्यों की मैन्युफैक्चरिंग GSDP को 250 अरब डॉलर से ऊपर ले जाना शामिल है। रिपोर्ट का दावा है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने पर 2047 तक भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी पा सकता है।

13 प्रमुख सेक्टर, 5 औद्योगिक क्लस्टर

रिपोर्ट में 20 मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का अध्ययन कर 13 हाई-इंपैक्ट सेक्टर चुने गए हैं। इन्हें पांच बड़े औद्योगिक क्लस्टरों में बांटा गया है:

  • इंजीनियरिंग गुड्स

  • कंज्यूमर प्रोडक्ट्स

  • लाइफ साइंसेज

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • केमिकल्स

इन सभी क्लस्टरों के लिए अलग-अलग तकनीकी रोडमैप तैयार किया गया है।

डिजिटल ट्विन्स और रोबोटिक्स से घटेगी लागत

रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल ट्विन्स की मदद से मशीनों और उत्पादों की वर्चुअल कॉपी तैयार की जा सकेगी, जिससे लागत और समय में 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत संभव है। वहीं रोबोटिक्स को अब केवल ऑटोमेशन नहीं बल्कि “मानव और मशीन की साझेदारी” के रूप में देखा जा रहा है।

MSME के लिए प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क

नीति आयोग ने देश में 20 प्लग-एंड-प्ले फ्रंटियर टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की सिफारिश की है। इनमें एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे छोटे और मझोले उद्योगों को भी अत्याधुनिक तकनीक सस्ते में उपलब्ध हो सकेगी।

स्किलिंग और नई औद्योगिक नीति के तीन स्तंभ

रिपोर्ट में हर राज्य के लिए अलग-अलग “फ्यूचर-रेडी स्किलिंग मिशन” की सिफारिश की गई है। साथ ही नई औद्योगिक नीति के तीन मजबूत स्तंभ बताए गए हैं—बेहतर बिजनेस माहौल, मजबूत इकोसिस्टम और आधुनिक तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर।

समय पर कदम न उठाने पर बड़ा नुकसान

नीति आयोग ने चेतावनी दी है कि अगर भारत समय रहते एडवांस मैन्युफैक्चरिंग को नहीं अपनाता, तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि एडवांस मैन्युफैक्चरिंग को राष्ट्रीय मिशन बनाकर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए तकनीकी रोजगार का भविष्य भी सुरक्षित कर सकता है।

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