नोएडा में ओवरएज वाहनों पर सख्ती, दो लाख से ज्यादा गाड़ियां हुईं कैंसिल, सस्पेंड और स्क्रैप
नोएडा जिले में परिवहन विभाग ने उम्र पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए सड़कों से हजारों पुराने वाहन हटाए हैं। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है। परिवहन विभाग का कहना है कि इस कदम का मकसद न सिर्फ प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है, बल्कि सड़क सुरक्षा को भी मजबूत करना है।
अप्रैल से नवंबर तक 10,500 से ज्यादा आरसी रद्द
परिवहन विभाग के एआरटीओ नंद कुमार ने बताया कि अप्रैल से नवंबर के बीच नोएडा जिले में 10,508 से अधिक वाहनों की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) रद्द की जा चुकी है। इनमें 1,542 वाहन 10 साल से पुराने डीजल और 8,966 वाहन 15 साल से पुराने पेट्रोल श्रेणी में आते हैं। जिन वाहनों की आरसी रद्द हो चुकी है, उन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद अगर कोई वाहन संचालन करता पाया गया तो उस पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नवंबर में ही 2.24 लाख से ज्यादा वाहन कार्रवाई के दायरे में
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, केवल नवंबर महीने में ही कैंसिल, सस्पेंड और स्क्रैपिंग की श्रेणी में आने वाले वाहनों की संख्या 2,24,985 तक पहुंच गई है। इसमें ट्रांसपोर्ट और नॉन-ट्रांसपोर्ट दोनों तरह के वाहन शामिल हैं।
नॉन-ट्रांसपोर्ट पेट्रोल वाहन सबसे ज्यादा
आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा संख्या नॉन-ट्रांसपोर्ट पेट्रोल वाहनों की है, जो 1,60,820 बताई गई है। वहीं 10 साल पुराने डीजल नॉन-ट्रांसपोर्ट वाहनों की संख्या 29,493 है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर की बात करें तो 15 साल पुराने पेट्रोल ट्रांसपोर्ट वाहन 19,702 और 10 साल पुराने डीजल ट्रांसपोर्ट वाहन 14,910 हैं।
स्क्रैपिंग सेंटर भेजी जा रहीं पुरानी गाड़ियां
परिवहन विभाग के अनुसार, इन सभी पुराने और अनुपयोगी वाहनों को तयशुदा स्क्रैपिंग केंद्रों पर भेजा जा रहा है, जहां उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये वाहन दोबारा सड़कों पर न लौटें। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से प्रदूषण में कमी आएगी और सड़कों से जर्जर व असुरक्षित वाहन हटेंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा।
वाहन मालिकों में नाराजगी, राहत की मांग
हालांकि इस सख्त कार्रवाई को लेकर आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि अचानक आरसी रद्द होने से उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि सरकार पुराने वाहन बदलने के लिए सब्सिडी, आसान लोन या अन्य राहत योजनाएं लागू करे, ताकि वे नए और पर्यावरण के अनुकूल वाहन खरीद सकें।
फिलहाल परिवहन विभाग का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।