चाइल्ड पीजीआई में पेलिएटिव केयर की शुरुआत, बच्चों के इलाज में करुणा पर जोर
पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग ने किया ‘फोरम’ कार्यक्रम का आयोजन
नोएडा स्थित चाइल्ड पीजीआई के पीडियाट्रिक हीमैटोलॉजी ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से ‘फोरम’ नामक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के इलाज में करुणामय, संवेदनशील और समग्र देखभाल को बढ़ावा देना रहा। आयोजन में डॉक्टरों, नर्सों, मनोवैज्ञानिकों, मरीज प्रतिनिधियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया।
इलाज के साथ पेलिएटिव केयर को शामिल करने पर फोकस
इस वर्ष फोरम का मुख्य विषय बच्चों के इलाज के दौरान बेहतर संवाद, प्रभावी दर्द प्रबंधन और इलाज की शुरुआत से ही पेलिएटिव केयर को जोड़ना रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि पेलिएटिव केयर का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार को दर्द, परेशानी और मानसिक तनाव से राहत देना है। यह देखभाल किसी भी उम्र और बीमारी के किसी भी चरण में दी जा सकती है।
जल्दी पेलिएटिव केयर शुरू करना इलाज छोड़ना नहीं
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुज सिंह ने कहा कि पेलिएटिव केयर को समय पर शुरू करना इलाज छोड़ने का संकेत नहीं है। इससे बच्चों और उनके परिवारों को बेहतर सहयोग, कम दर्द और सम्मानजनक इलाज मिलता है। उन्होंने कहा कि यह देखभाल बच्चों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाती है।
डॉक्टर और परिवार के बीच संवाद बेहद जरूरी
दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रिंसिपल डॉ. धीरज शाह ने कहा कि गंभीर बीमारी से जुड़ी जानकारी देना एक संवेदनशील प्रक्रिया है। डॉक्टरों का व्यवहार और संवाद मरीज के परिवार का भरोसा मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि सही तरीके से बात करने से इलाज की प्रक्रिया आसान होती है।
संवेदनशील संवाद से बेहतर होते हैं इलाज के नतीजे
कार्यक्रम के दौरान संवाद कौशल पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सही भाषा, धैर्य और संवेदनशीलता से न केवल परिवार का तनाव कम होता है, बल्कि इलाज के परिणाम भी बेहतर होते हैं। आयोजन अध्यक्ष डॉ. नीता राधाकृष्णन ने कहा कि करुणामय देखभाल बीमारी के पहले दिन से ही शुरू होनी चाहिए।
बच्चों के दर्द और डर को कम करने पर चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में बच्चों के दर्द को कम करने और आरामदायक इलाज के तरीकों पर चर्चा हुई। इस दौरान ग्लोबल कम्फर्ट प्रॉमिस के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसका उद्देश्य इलाज के दौरान बच्चों के डर और दर्द को न्यूनतम करना है।