भारत में आय और संपत्ति की खाई रिकॉर्ड स्तर पर: टॉप 10% के पास 65% वेल्थ, कमाई का 58% हिस्सा

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भारत में आर्थिक असमानता एक बार फिर नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई है। वर्ल्ड इनइक्वालिटी रिपोर्ट 2026 के अनुसार देश में आय और संपत्ति का बड़ा हिस्सा सीमित लोगों के हाथों में सिमटता जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि भारत की राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा टॉप 10% अमीर लोगों के पास चला जाता है, जबकि देश की नीचे की 50% आबादी को सिर्फ 15% आय मिलती है।
यह अंतर साल-दर-साल बढ़ता दिख रहा है। 2021 में टॉप 10% का आय हिस्सा 57% था, जो अब 1% और बढ़ गया है।

संपत्ति में भी बेहद तेज असमानता

आय ही नहीं, वेल्थ यानी संपत्ति के मामले में भारत और अधिक असमान दिखता है। रिपोर्ट के अनुसार—

  • टॉप 10% के पास देश की कुल संपत्ति का 65% हिस्सा है।

  • टॉप 1% के पास ही लगभग 40% वेल्थ है।

देश में प्रति व्यक्ति औसत संपत्ति करीब 29.62 लाख रुपए है, लेकिन यह औसत बहुत भ्रामक है। नीचे की 50% आबादी के पास प्रति व्यक्ति सिर्फ 6.88 लाख रुपए की औसत संपत्ति है। इसके मुकाबले, टॉप 10% लोगों की प्रति व्यक्ति औसत वेल्थ 10.58 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।
सबसे ऊपर के 0.001% यानी केवल 56,000 लोगों के पास प्रति व्यक्ति 10 करोड़ यूरो (लगभग ₹1,058 करोड़) से अधिक की संपत्ति मौजूद है।

महिलाओं की स्थिति सबसे कमजोर

रिपोर्ट में रोजगार के क्षेत्र में भी असमानता को लेकर गंभीर संकेत मिले हैं।
भारत में फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट मात्र 15.7% है
इसका मतलब—
हर 100 पुरुषों पर केवल 15.7 महिलाएं ही रोजगार में शामिल हैं।
यह स्थिति पिछले एक दशक से लगभग स्थिर है और इसमें कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। वहीं, वैश्विक स्तर पर महिलाएं कुल श्रम आय का सिर्फ 25% ही कमा पाती हैं।

वैश्विक तुलना में भारत शीर्ष असमान देशों में

दुनिया के कई विकसित देशों में असमानता का अंतर भारत के मुकाबले काफी कम है। उदाहरण:

  • यूरोप (स्वीडन, नॉर्वे): बॉटम 50% को आय का 25% हिस्सा मिलता है।

  • ब्राजील, मैक्सिको जैसे देशों में टॉप 10% की आय हिस्सेदारी 60% के आसपास है।

  • दक्षिण अफ्रीका—भारत के बाद दुनिया में सबसे अधिक असमानता वाला देश माना जाता है।

पूरी दुनिया की औसत स्थिति देखें तो टॉप 10% लोगों के पास 75% वेल्थ होती है, जबकि बॉटम 50% के पास सिर्फ 2% संपत्ति।

मिडिल क्लास का सिकुड़ना, कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ा अंतर

रिपोर्ट बताती है कि 1980 में भारत की बड़ी आबादी वैश्विक मिडिल 40% में शामिल थी, लेकिन 2025 तक इसका बड़ा हिस्सा बॉटम 50% में खिसक गया है। वहीं चीन आर्थिक सीढ़ी पर ऊपर चढ़ चुका है।

पर्यावरण पर भी असमानता का गहरा प्रभाव दिखता है—
टॉप 10% लोग 77% कार्बन उत्सर्जन के जिम्मेदार हैं, जबकि
बॉटम 50% केवल 3% उत्सर्जन करते हैं।

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