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कानपुर में स्कूली वाहनों पर सख्ती, अगस्त से नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई

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शिवा दुलारे, कानपुर

स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कानपुर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिले में स्कूल बसों, वैन और अन्य विद्यालयी वाहनों के संचालन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। जुलाई महीने में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जबकि अगस्त से सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले स्कूल वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित जिला विद्यालय वाहन परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने की। इस दौरान घाटमपुर विधायक सरोज कुरील, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस प्रशासन के अधिकारी तथा विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में स्कूली बच्चों की सुरक्षा, वाहनों की फिटनेस, यातायात नियमों के पालन और विद्यालय परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक में घाटमपुर विधायक सरोज कुरील ने कहा कि विद्यालय आने-जाने वाले प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में संचालित सभी विद्यालयी वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक के लाइसेंस और सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन स्कूलों या वाहन संचालकों द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाएगी, उनके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की जान से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

जुलाई रहेगा जागरूकता माह

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि पहले लोगों को नियमों के प्रति जागरूक बनाना है। इसी उद्देश्य से पूरे जुलाई माह को स्कूली वाहन सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से विद्यालयों के बाहर विशेष जागरूकता अभियान चलाएंगे। वाहन चालकों, परिचालकों, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को सड़क सुरक्षा, वाहन संचालन के नियमों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों की जानकारी दी जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि सभी संबंधित पक्ष नियमों का पालन करेंगे तो दुर्घटनाओं की संभावना स्वतः कम हो जाएगी।

रविवार को लगेंगे विशेष शिविर

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वाहन संचालकों की सुविधा के लिए रविवार को विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में वाहन फिटनेस जांच, परमिट सत्यापन, दस्तावेजों का नवीनीकरण, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं एक ही स्थान पर पूरी कराई जाएंगी। इस व्यवस्था से वाहन मालिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और अधिक से अधिक वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जा सकेंगे।

स्कूलों के बाहर लगेंगे सड़क सुरक्षा बोर्ड

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जिले के प्रत्येक विद्यालय के बाहर सड़क सुरक्षा से जुड़े चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। इन बोर्डों पर वाहन चालकों के लिए गति सीमा, सावधानीपूर्वक वाहन चलाने, हॉर्न का सीमित उपयोग और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि ऐसे संकेतक बोर्ड दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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अगस्त से शुरू होगा विशेष प्रवर्तन अभियान

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि जुलाई के दौरान लोगों को जागरूक किया जाएगा, लेकिन अगस्त से किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अगस्त से परिवहन विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर स्कूल बसों और अन्य विद्यालयी वाहनों की जांच करेगी। जिन वाहनों में फिटनेस प्रमाणपत्र, वैध परमिट, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी अथवा अन्य अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं मिलेगा, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर वाहनों का चालान, परमिट निरस्त करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

उत्कृष्ट विद्यालय होंगे सम्मानित

बैठक में एक सकारात्मक पहल की भी घोषणा की गई। प्रशासन ऐसे पांच विद्यालयों का चयन करेगा जो अपने विद्यालयी वाहनों में सभी सुरक्षा मानकों का उत्कृष्ट पालन कर रहे होंगे। इन विद्यालयों को सम्मानित किया जाएगा ताकि अन्य स्कूल भी उनसे प्रेरणा लेकर अपने परिवहन तंत्र को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बना सकें। प्रशासन का मानना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है।

अभिभावकों से भी सहयोग की अपील

जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासन या स्कूलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी स्कूल वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे हों, वाहन की स्थिति खराब हो या चालक लापरवाही से वाहन चला रहा हो तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या संबंधित विभाग को दें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही सुरक्षित स्कूल परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।

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सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

कानपुर जिला प्रशासन की यह पहल स्कूली बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों को देखते हुए सरकार और प्रशासन सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर लगातार गंभीरता दिखा रहे हैं। अब जुलाई में जागरूकता और अगस्त से सख्त कार्रवाई की रणनीति के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जिले का कोई भी स्कूली वाहन बिना निर्धारित सुरक्षा मानकों के सड़क पर न चले और प्रत्येक बच्चा सुरक्षित वातावरण में विद्यालय पहुंच सके।

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