लखनऊ में अधिवक्ताओं पर कार्रवाई के विरोध में बिल्हौर के वकीलों का प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
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अधिवक्ताओं ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
कानपुर के बिल्हौर में अधिवक्ता संगठनों ने लखनऊ में वकीलों के चेंबरों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई और विरोध कर रहे अधिवक्ताओं पर कथित लाठीचार्ज के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नाराज अधिवक्ताओं ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन बिल्हौर एसडीएम मनीष कुमार को सौंपा। वकीलों ने दोषी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
17 मई की कार्रवाई के विरोध में उबाल
अधिवक्ताओं का कहना है कि 17 मई को लखनऊ में वर्षों पुराने अधिवक्ताओं के चेंबरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वकीलों पर बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया गया, जिससे अधिवक्ता समाज में भारी रोष है।इस मामले को लेकर बिल्हौर बार एसोसिएशन, द लायर्स एसोसिएशन और एकीकृत एडवोकेट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था की रक्षा की बात कही।
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अधिवक्ता संगठनों ने जताई कड़ी नाराजगी
बार एवं द लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार कटियार और जनार्दन सिंह यादव ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अधिवक्ता समाज हमेशा गरीब, शोषित और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने का कार्य करता है। ऐसे में वकीलों के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के चेंबरों को ध्वस्त करना केवल भवन गिराना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। शांतिपूर्ण विरोध कर रहे अधिवक्ताओं पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें
अधिवक्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही ध्वस्त किए गए चेंबरों के स्थान पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही। वकीलों ने लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा घायल अधिवक्ताओं को उचित उपचार और मुआवजा देने की मांग की गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
आंदोलन की चेतावनी
अधिवक्ता संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
सैकड़ों अधिवक्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान सौरभ कटियार, टुन्नु मिश्रा, कुशल पांडे, महेंद्र सिंह कुशवाहा, विनीत गुप्ता और अनुराग द्विवेदी सहित सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर न्याय और सम्मान की मांग उठाई।