विशेष सत्र पर कांग्रेस का सवाल ! महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन का मुद्दा?
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कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा प्रस्तावित है, लेकिन सोनिया गांधी का कहना है कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन है।
‘परिसीमन है असली एजेंडा’
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे “बेहद खतरनाक” और “संविधान पर हमला” बताया। उनके अनुसार, जिस तरह से अचानक विशेष सत्र बुलाया गया है, उससे सरकार की मंशा पर संदेह होता है। उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी जाति जनगणना जैसे मुद्दों को टालने और भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
लेख के जरिए सरकार पर निशाना
‘द हिंदू’ अखबार में प्रकाशित अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन मांग रहे हैं, जिन्हें जल्दबाजी में पास कराने की तैयारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल अपने चरम पर है, तब इस सत्र को बुलाने का क्या औचित्य है। उनके मुताबिक, यह कदम राजनीतिक लाभ लेने और विपक्ष को दबाव में लाने की रणनीति का हिस्सा है।
महिला आरक्षण कानून पर बहस
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ पारित किया था। इस कानून के तहत संविधान में अनुच्छेद 334-A जोड़ा गया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान है। हालांकि, यह आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होना है। कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष ने इस तरह की शर्त की मांग नहीं की थी और वह चाहता था कि यह आरक्षण 2024 के चुनावों से ही लागू हो।
विशेष सत्र की टाइमिंग पर सवाल
सोनिया गांधी ने पूछा कि यदि सरकार को अपने रुख में बदलाव करना था, तो इसमें 30 महीने क्यों लगे? साथ ही, कुछ हफ्तों का इंतजार कर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई गई। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने तीन बार पत्र लिखकर 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया।
अतीत से सीख और सहमति की जरूरत
उन्होंने 1993 के 73वें और 74वें संविधान संशोधनों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय व्यापक चर्चा और सहमति के बाद ही पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया गया था। यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बड़ी उपलब्धि थी। आज देश में करीब 15 लाख से अधिक महिला जनप्रतिनिधि स्थानीय निकायों में कार्य कर रही हैं, जो इस नीति की सफलता को दर्शाता है।
जनगणना में देरी और उसके प्रभाव
सोनिया गांधी ने जनगणना में देरी को भी बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि 2021 में होने वाली जनगणना को लगातार टाला गया, जिससे करोड़ों लोग ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ के लाभ से वंचित रह गए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब डिजिटल जनगणना की बात कर रही है, जिसके आंकड़े 2027 तक ही उपलब्ध हो पाएंगे। ऐसे में परिसीमन को लेकर जल्दबाजी के पीछे के तर्क कमजोर नजर आते हैं।
जाति जनगणना पर सरकार को घेरा
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले जाति आधारित जनगणना का विरोध किया, लेकिन बाद में 2027 में इसे कराने की बात कही। उन्होंने इसे सरकार के बदलते रुख का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है। कुल मिलाकर, कांग्रेस का मानना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे के पीछे सरकार परिसीमन जैसे बड़े राजनीतिक बदलाव को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिस पर व्यापक बहस और सहमति आवश्यक है।