“टैक्स कटौती या सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट?” कांग्रेस का सरकार पर तीखा वार
Mediawali news
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती के फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस कदम को “दिखावटी राहत” बताते हुए कहा कि आम जनता को इससे कोई वास्तविक फायदा नहीं मिला है। उनके मुताबिक, सरकार का यह फैसला केवल सुर्खियां बटोरने के लिए है, जबकि जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिल रही।
“उपभोक्ताओं को नहीं मिला फायदा”
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर लोग यह सोच रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल सस्ता हो गया है, तो यह गलतफहमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में डीलरों और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कोई खास अंतर नहीं आया है। उनके अनुसार, कीमतें लगभग पहले जैसी ही बनी हुई हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ कम नहीं हुआ।
तेल कंपनियों को राहत का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने जो कटौती की है, वह सीधे उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय तेल कंपनियों के बोझ को कम करने के लिए की गई है। पवन खेड़ा ने कहा कि यह कटौती “विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क” में की गई है, जो कंपनियां सरकार को देती हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे कंपनियों को घाटा हो रहा था। ऐसे में सरकार ने कंपनियों को राहत दी है, न कि आम जनता को।
सरकार को दी सलाह
कांग्रेस नेता ने सरकार को सुझाव दिया कि वह केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे सीधे तौर पर आम लोगों को फायदा पहुंचे और ईंधन की कीमतों में स्पष्ट कमी दिखाई दे।
सरकार का पक्ष और आश्वासन
वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बताया कि भारत के पास लगभग 60 दिनों का तेल भंडार मौजूद है और आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है। साथ ही, पेट्रोल पंप संचालकों को कार्यशील पूंजी की समस्या से बचाने के लिए क्रेडिट अवधि भी बढ़ाई गई है।
सरकार ने यह भी कहा कि बाजार में कमी की खबरें भ्रामक हैं और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।