ईरान विवाद पर मुस्लिम देशों में दरार, पाकिस्तान-तुर्की और सऊदी आमने-सामने
. रियाद बैठक में दिखा मतभेद, ईरान मुद्दे पर एकजुट नहीं दिखे मुस्लिम देश
Mediawali news
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran को लेकर मुस्लिम देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हाल ही में Riyadh में हुई एक अहम बैठक में यह साफ दिखा कि सभी देश इस मुद्दे पर एक राय नहीं हैं। खासतौर पर Pakistan और Turkey ने Saudi Arabia के रुख का विरोध किया।
रिपोर्ट के अनुसार, अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की इस बैठक में सऊदी अरब चाहता था कि ईरान के खिलाफ कड़ी भाषा में निंदा की जाए। लेकिन पाकिस्तान और तुर्की इसके लिए तैयार नहीं थे। दोनों देशों का मानना था कि बयान में इतनी सख्ती नहीं होनी चाहिए।
हालात उस समय और गंभीर हो गए, जब बैठक के दौरान ही ईरान ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर दिए। बताया जा रहा है कि इसके बाद ही तुर्की ने कुछ हद तक सख्त भाषा पर सहमति जताई। तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने ईरान के समकक्ष से बातचीत में यह मुद्दा उठाया और कहा कि ऐसे समय में हमला नहीं होना चाहिए था, जब बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश चल रही थी।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान और तुर्की का एक साथ खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक ये देश सऊदी अरब के साथ मिलकर एक सुरक्षा समझौते पर चर्चा कर रहे थे। इस समझौते का मकसद क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना था, लेकिन मौजूदा हालात ने इस एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अगर पाकिस्तान और तुर्की इस बैठक में शामिल नहीं होते, तो सऊदी अरब ईरान के खिलाफ और भी कड़ा बयान जारी कर सकता था। इससे यह साफ है कि मुस्लिम देशों के भीतर अब एकजुटता कम होती दिख रही है।
इस विवाद का असर सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्तों पर भी पड़ा है। दोनों देशों के बीच पहले एक रक्षा समझौता हुआ था, जिसमें एक-दूसरे की सुरक्षा का वादा किया गया था। लेकिन ईरान के हमलों के बावजूद पाकिस्तान का सऊदी अरब के समर्थन में खुलकर न आना, रिश्तों में दूरी बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह स्थिति दिखाती है कि पश्चिम एशिया के इस संकट ने न सिर्फ क्षेत्रीय शांति को प्रभावित किया है, बल्कि मुस्लिम देशों के बीच एकता को भी कमजोर कर दिया है।