दिल्ली में धूल का खतरा: DDA टॉप उल्लंघनकर्ता
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सर्दियों के शुरू होते ही वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है। इस बीच सड़कों पर जमा धूल को लेकर की गई हालिया जांच में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता के रूप में सामने आया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा कराए गए तीसरे राउंड के निरीक्षण में रोहिणी क्षेत्र की 57 सड़कों की जांच की गई, जिसमें 12 सड़कों पर अत्यधिक धूल जमा पाई गई।
अभियान में शामिल 22 फ्लाइंग स्क्वाड्स ने सड़क धूल के स्तर और उसकी रोकथाम के लिए लागू उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया। यह निरीक्षण ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत किया गया था। CAQM अधिकारियों ने बताया कि जिन सड़कों पर धूल की मात्रा ज्यादा पाई गई, वहां प्रभावी नियंत्रण उपाय लागू नहीं किए गए थे।
अधिकारियों का कहना है कि निर्माण स्थलों की निगरानी, सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव जैसे कदमों में कमी नजर आ रही है। इस लापरवाही का सीधा असर दिल्ली की पहले से प्रदूषित हवा पर पड़ रहा है, जिससे प्रदूषण स्तर तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि धूल कणों के बढ़ते स्तर के कारण सांस संबंधी रोगों में इजाफा हो रहा है और हालात और बिगड़ सकते हैं।
नागरिकों और विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
स्थानीय निवासियों ने भी धूल प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सुबह-शाम हवा में धूल साफ दिखाई देती है और सांस लेना कठिन हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि सभी सरकारी एजेंसियां मिलकर तुरंत और सख्त कदम उठाएं।
वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ मौसमी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लंबी अवधि की रणनीति, नियमित निरीक्षण और नागरिक सहभागिता जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक सड़क धूल प्रबंधन को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक दिल्ली की हवा को साफ रखना मुश्किल होगा।
सरकारी एजेंसियों को चेतावनी देते हुए CAQM ने कहा है कि यदि सुधारात्मक कदमों में देरी होती है, तो नियमों का उल्लंघन करने वाले विभागों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।