CWG 2026 में नीरज चोपड़ा की नजर दूसरे कॉमनवेल्थ गोल्ड पर, आज जेवलिन फाइनल मुकाबला।
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भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारों में शामिल नीरज चोपड़ा एक बार फिर इतिहास रचने के बेहद करीब हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जेवलिन थ्रो फाइनल में शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि होने वाले मुकाबले में नीरज स्वर्ण पदक के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल हैं। क्वालिफिकेशन राउंड में 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर फाइनल में जगह बनाने वाले नीरज से देशभर के खेल प्रेमियों को एक और गोल्ड मेडल की उम्मीद है। यह मुकाबला सिर्फ एक पदक का नहीं, बल्कि उस खिलाड़ी की वापसी का भी है जिसने चोट, आलोचना और मुश्किल दौर से उबरकर खुद को फिर से दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल किया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी हैं सुनहरी यादें
नीरज चोपड़ा के करियर में कॉमनवेल्थ गेम्स का खास स्थान है। वर्ष 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में उन्होंने 86.47 मीटर का भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था। इसी के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष जेवलिन थ्रो का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे। यह जीत उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इसके बाद उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं।
गोल्ड के बाद शुरू हुआ ऐतिहासिक सफर
गोल्ड कोस्ट में स्वर्ण जीतने के कुछ ही महीनों बाद नीरज ने एशियाई खेलों में 88.06 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भारत को एथलेटिक्स का पहला ओलंपिक स्वर्ण दिलाकर इतिहास रचा। फिर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड और पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतकर उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ भालाफेंक खिलाड़ियों में स्थापित कर दिया।
2022 में चोट बनी थी सबसे बड़ी रुकावट
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में नीरज चोपड़ा हिस्सा नहीं ले सके थे। पीठ की चोट के कारण उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा था। ऐसे में 2026 का यह फाइनल उनके लिए केवल वापसी नहीं, बल्कि आठ साल बाद कॉमनवेल्थ मंच पर अधूरी कहानी को फिर से पूरा करने का अवसर भी है।
चोट से सीखा, खेल को नए तरीके से समझा
पिछले एक वर्ष में नीरज को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लगातार पीठ दर्द के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ और 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप उनके करियर की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में से एक रही। लेकिन यहीं से उन्होंने अपने खेल को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी रन-अप तकनीक, थ्रो का एंगल और शरीर के संतुलन पर विशेष काम किया। सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिक तैयारी में देखने को मिला।अब वह हर प्रतियोगिता में चोट के डर के बजाय आत्मविश्वास के साथ उतरते हैं।
मानसिक मजबूती बनी सबसे बड़ी ताकत
बीबीसी के पॉडकास्ट More Than The Score में नीरज ने बताया था कि उन्होंने दोहा डायमंड लीग में खेलने का फैसला प्रतियोगिता से केवल सात दिन पहले लिया था। उन्होंने कहा कि अब उनका ध्यान केवल ज्यादा अभ्यास करने पर नहीं, बल्कि स्मार्ट ट्रेनिंग पर है। वह शरीर पर उतना ही दबाव डालते हैं, जितना जरूरी हो। यही सोच उन्हें लंबे समय तक फिट और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद कर रही है।
गोल्ड के लिए कड़ी चुनौती
फाइनल में नीरज के सामने कई मजबूत अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होंगे। हालांकि अनुभव, तकनीक और बड़े मंच पर लगातार शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें स्वर्ण पदक का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। यदि नीरज अपनी लय में रहे और 85 से 90 मीटर के आसपास का थ्रो करने में सफल रहे, तो भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक आ सकता है।
कब, कहां और कैसे देखें मुकाबला?
- स्पर्धा: पुरुष जेवलिन थ्रो फाइनल
- टूर्नामेंट: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026
- दिन: शुक्रवार-शनिवार की मध्यरात्रि
- भारतीय समय: आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार
- लाइव टेलीकास्ट: अधिकृत स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट चैनल
- लाइव स्ट्रीमिंग: आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रसारण साझेदार
करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों का केंद्र
नीरज चोपड़ा अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की नई पहचान बन चुके हैं। उनकी हर प्रतियोगिता के साथ करोड़ों लोगों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह फाइनल उनके लिए केवल एक और पदक जीतने का अवसर नहीं है, बल्कि यह साबित करने का भी मौका है कि कठिन दौर के बाद भी एक सच्चा चैंपियन पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौट सकता है। अगर शुक्रवार की रात नीरज का भाला एक बार फिर आसमान चीरता हुआ सबसे दूर जाकर गिरे, तो यह सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं होगा, बल्कि भारतीय खेल इतिहास में एक और यादगार अध्याय जुड़ जाएगा।