मदरसा गौसिया शकूरिया में 44 वां उर्स व जश्ने दस्तार का आयोजन
धार्मिक, शैक्षिक और ऐतिहासिक उपलब्धियों का साक्षी बना कस्बा
कानपुर/बिल्हौर स्थित मदरसा गौसिया कादरीया शकूरिया में मंगलवार को 44वां उर्स-ए-शकूरी एवं जश्ने दस्तारबंदी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम सय्यद उवैस मुस्तफा वास्ती, बिलग्राम शरीफ की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। जलसे की कयादत काज़ी-ए-शहर बिल्हौर मौलाना अनिसुर्रहमान नूरी ने की, जबकि सदारत नायब शहरकाज़ी मौलाना मोहम्मद सलमान आरिफ़ ने की। कार्यक्रम की शुरुआत मदरसा छात्रों द्वारा कुरान-ए-पाक की तिलावत से हुई।
बिल्हौर को मिला पहला मुफ़्ती, रचा गया इतिहास
बिल्हौर की दीनि और इल्मी तारीख में यह एक ऐतिहासिक पल रहा, जब पहली बार कस्बे से मुफ़्ती कोर्स मुकम्मल कर सनद-ए-इफ्ता हासिल करने का गौरव मुफ़्ती नज़रुल इस्लाम मिस्बाही शकूरी को प्राप्त हुआ। उर्स-ए-शकूरी के दौरान सदर दारुल इफ्ता, जामिया शकूरिया मुफ़्ती रफ़ीक़ुल इस्लाम नूरी ने ऐलान किया कि अब दारुल इफ्ता की पूरी ज़िम्मेदारी और फ़तवा देने का कार्य मुफ़्ती नज़रुल इस्लाम अंजाम देंगे।
छात्रों को मिली दस्तार और सनद
कार्यक्रम के दौरान 32 मदरसा छात्रों को तलबा, आलिम, मुफ़्ती और हाफ़िज़ की सनद व उपाधियां प्रदान की गईं। कस्बे के मुफ़्ती नज़रुल इस्लाम को उवैस मुस्तफा मियां द्वारा मुफ़्ती की सनद से नवाज़ा गया, जबकि कौनैन रज़ा ख़ान और उवैस ख़ान क़ादरी को हाफ़िज़ की दस्तार नायब शहरकाज़ी मौलाना सलमान आरिफ़ ने पहनाई।
शिक्षा पर दिया गया विशेष संदेश
जलसे को संबोधित करते हुए बहराइच से आए मुफ़्ती रफीक़ आलम ने शिक्षा की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चे समाज और मुल्क की रौनक होते हैं। उन्होंने दीनी के साथ दुनियावी तालीम को भी ज़रूरी बताया। वहीं मौलाना फुरकान ख़ान ने कहा कि इल्म के रास्ते में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, उनसे लड़कर ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
दुआओं के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम के बाद काज़ी-ए-शहर कानपुर मुफ़्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने देश की तरक्की, अमन और सलामती के लिए दुआ कराई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बिल्हौर सहित कानपुर, कन्नौज व आसपास के जिलों की अवाम, उलमा, शिक्षक और पत्रकार मौजूद रहे।