खामेनेई की हत्या पर सरकार की चुप्पी पर सोनिया गांधी का सवाल
Mediawali news
कांग्रेस की राज्यसभा सांसद Sonia Gandhi ने ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की टारगेट किलिंग पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने कहा कि दिल्ली की खामोशी हैरान करने वाली है। यह तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है।
“बिना युद्ध घोषणा के हत्या”
सोनिया गांधी ने लिखा कि यह घटना उस समय हुई जब कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी थी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के अनुसार किसी भी देश की संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी इस पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाता, तो नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था कमजोर होगी।
पीएम का इजराइल दौरा और प्रतिक्रिया
लेख में उल्लेख किया गया कि हत्या से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi इजराइल यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के नेतृत्व वाली सरकार के साथ सहयोग दोहराया। सोनिया ने आरोप लगाया कि भारत ने हमले की निंदा नहीं की, बल्कि केवल यूएई पर ईरान की जवाबी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी।
ग्लोबल साउथ, ब्रिक्स और भारत की भूमिका
सोनिया गांधी ने कहा कि ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स देशों—जैसे रूस और चीन—ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाया है। ऐसे समय में भारत का स्पष्ट नैतिक आधार पर बोलना जरूरी है, क्योंकि उसके तेहरान और तेल अवीव दोनों से संबंध हैं।
ऐतिहासिक संबंध और रणनीतिक हित
उन्होंने याद दिलाया कि 1994 में OIC में कश्मीर मुद्दे पर ईरान ने भारत का समर्थन किया था। 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के तेहरान दौरे में दोनों देशों के गहरे संबंधों की पुष्टि हुई थी।
सोनिया ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं। भारत की गुटनिरपेक्ष और रणनीतिक स्वायत्त विदेश नीति ने ही संकट के समय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
संसद में बहस की मांग
सोनिया गांधी ने संसद में इस मुद्दे पर खुली बहस की मांग की। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और भारत की विश्वसनीयता दांव पर है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ केवल नारा नहीं, बल्कि न्याय और संवाद की प्रतिबद्धता है—और ऐसे समय में चुप रहना उस सिद्धांत से पीछे हटना है।