जनता हारी, सिस्टम जीता’: चुनाव नतीजों पर तेजस्वी यादव का बड़ा बयान, सरकार के पहले 100 दिनों पर चुप्पी
राजद नेता बोले—लोकतंत्र को धन-तंत्र और मशीन-तंत्र में बदला गया, घोषणापत्र के वादों को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी
पटना।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने हालिया चुनाव परिणामों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में लोकतंत्र में ‘जनता’ हारी है और ‘सिस्टम’ जीता है। तेजस्वी के मुताबिक, जनता आधारित लोकतंत्र को धीरे-धीरे धन-तंत्र और मशीन-तंत्र में तब्दील कर दिया गया, जिससे चुनावी नतीजों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार के गठन के बाद पहले 100 दिनों तक वे उसके कामकाज पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
पटना में बयान जारी करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्हें भली-भांति पता है कि चुनाव के दौरान किस तरह की साजिशें रची गईं और किस तरह कथित धांधली व फ्रॉड के जरिए नतीजों को प्रभावित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार कैसे बनी, यह किसी से छिपा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वे इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार, समय आने पर जनता खुद सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करेगी।
पहले 100 दिनों पर संयम
तेजस्वी यादव ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार के गठन के बाद शुरुआती 100 दिनों तक वे किसी भी तरह की आलोचना या टिप्पणी से परहेज करेंगे। उन्होंने कहा कि यह अवधि सरकार को अपने फैसलों और नीतियों के जरिए अपनी मंशा साबित करने के लिए दी जानी चाहिए। इस दौरान वे संयम बरतेंगे और सरकार को काम करने का अवसर देंगे।
घोषणापत्र के वादों की याद
राजद नेता ने सरकार के चुनावी घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कई बड़े और महत्वपूर्ण वादे किए गए थे। इनमें माताओं और बहनों को आर्थिक लाभ देने, सामाजिक कल्याण योजनाओं को मजबूत करने और 1 करोड़ युवाओं को रोजगार देने जैसे दावे शामिल हैं। तेजस्वी ने कहा कि अब यह देखना अहम होगा कि इन वादों को जमीन पर किस हद तक और किस गति से लागू किया जाता है।
सरकार की जिम्मेदारी पर जोर
तेजस्वी यादव ने दोहराया कि घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को पूरा करना मौजूदा सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 100 दिन पूरे होने के बाद सरकार के कामकाज का निष्पक्ष आकलन जनता के सामने रखा जाएगा। फिलहाल, उन्होंने जनता से धैर्य रखने की अपील की और कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही तय करना सबसे जरूरी है।