हसीना को सुनाई मौत की सज़ा : बांग्लादेश ने भारत को भेजा पत्र

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बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। देश के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की है। यह मांग उस समय हुई जब बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने हसीना को “मानवता के खिलाफ अपराध” के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई। ट्रिब्यूनल ने हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून को भी दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि पिछले वर्ष छात्रों पर हुए दमन के दौरान ये सभी शीर्ष अधिकारी ज़िम्मेदार थे।

पिछले साल जुलाई में छात्रों के बड़े पैमाने पर हुए आंदोलन के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक संकट गहराया। बढ़ते विरोध और जनविद्रोह के बीच अगस्त में हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी और वह देश से बाहर निकल गईं। तभी से वे भारत में एक “गुप्त सुरक्षित स्थान” पर रह रही हैं। उनके बेटे सजीब वाज़ेद ने भी पुष्टि की थी कि भारत उनकी मां को पूर्ण सुरक्षा दे रहा है। हसीना ने भी एक मीडिया साक्षात्कार में लिखा था,  “मैं भारत का आभारी हूं, जिसने मुझे एक साल से सुरक्षित आश्रय दिया।” 78 वर्षीय शेख हसीना को बांग्लादेश की अदालत ने उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों में पेश होने के लिए वापस लौटने का आदेश दिया था, जिसमें यह जांच शामिल थी कि क्या उन्होंने छात्रों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई का आदेश दिया था। लेकिन हसीना ने यह आदेश मानने से इनकार कर दिया।

बांग्लादेश द्वारा भेजा गया यह पत्र भारत के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है। एक तरफ भारत शेख हसीना को सुरक्षा दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश उन्हें “भगोड़ा आरोपी” बताते हुए सौंपने की मांग कर रहा है। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह मामला केवल दो देशों के संबंधों से ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिरता से भी जुड़ा है।

हसीना बोलीं–ये एक तरफा फैसला, मेरा पक्ष नहीं सुना गया, ये उस सरकार के दौरान फैसला लिया गया जहां बिना चुनी हुई सरकार में है।

navya seth
navya seth
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