भाजपा ने पूर्ण अध्यक्ष की जगह क्यों किया कार्यकारी अध्यक्ष का एलान?

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भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही जेपी नड्डा पार्टी अध्यक्ष पद से मुक्त हो गए। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा ने फिलहाल पूर्णकालिक अध्यक्ष के बजाय कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति क्यों की?

भाजपा की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह नियुक्ति 14 दिसंबर 2025 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि यह फैसला भाजपा संसदीय बोर्ड ने लिया है।

खरमास से जुड़ी मानी जा रही है वजह

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस फैसले के पीछे खरमास की भूमिका अहम है। मंगलवार से खरमास की शुरुआत हो रही है, जो 14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) तक रहेगा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मांगलिक और बड़े निर्णयों से परहेज किया जाता है।

ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा खरमास समाप्त होने के बाद ही नए पूर्णकालिक अध्यक्ष का एलान कर सकती है। चूंकि अध्यक्ष पद की घोषणा खरमास से ठीक पहले होनी थी, इसलिए पार्टी ने फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का रास्ता चुना।

नड्डा को मिली चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी

सूत्रों के अनुसार, इस फैसले से जेपी नड्डा अब संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के चुनावी रणनीति पर पूरा ध्यान दे सकेंगे। नड्डा का कार्यकाल 2024 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन अध्यक्ष चुनाव में देरी के चलते इसे एक साल के लिए बढ़ाया गया था।

पहले भी खरमास में टाले गए हैं बड़े फैसले

यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने ज्योतिषीय गणनाओं को ध्यान में रखते हुए अहम फैसलों को टाला हो।

  • 2017 में विधानसभा चुनाव की प्रत्याशी सूची तैयार होने के बावजूद उसका एलान खरमास के बाद किया गया था।

  • 2023-24 लोकसभा चुनाव की तैयारियों और प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी खरमास के बाद तेज की गई थी।

क्या नितिन नबीन ही बनेंगे पूर्ण अध्यक्ष?

भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक पार्टी में 11 अध्यक्ष रह चुके हैं। इनमें से सिर्फ दो नेता ऐसे रहे हैं, जिन्हें पहले कार्यकारी अध्यक्ष और बाद में पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाया गया।

पहले कब बने कार्यकारी अध्यक्ष?
  • जना कृष्णमूर्ति: 2001 में बंगारू लक्ष्मण के इस्तीफे के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बने और बाद में पूर्ण अध्यक्ष बनाए गए।

  • जेपी नड्डा: 2019 में अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बने और 2020 में पूर्ण अध्यक्ष नियुक्त हुए।

इन्हीं उदाहरणों के आधार पर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खरमास के बाद नितिन नबीन को ही भाजपा का पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाया जा सकता है, हालांकि पार्टी की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

फिलहाल भाजपा संगठन की कमान कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के हाथों में है और सभी की नजरें 14 जनवरी के बाद होने वाले अगले बड़े संगठनात्मक फैसले पर टिकी हैं।

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