वामपंथी हिंसा से नहीं झुकूंगा, राष्ट्रसेवा जारी रहेगी- सी. सदानंदन मास्टर
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नई दिल्ली के शंकरलाल ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय संविधान की बेटियाँ: विकसित भारत 2047” का समापन हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन NCWEB, ABRSM और ICSSR के सहयोग से किया गया। संगोष्ठी में महिला सशक्तीकरण, संवैधानिक मूल्यों और विकसित भारत की दिशा में महिलाओं की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।
इस दौरान संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों के योगदान और उनके नेतृत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। दो दिनों में 224 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
सदानंदन मास्टर का तीखा बयान
मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण उनके जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने कहा, “मेरे तन को मार सकते हैं, लेकिन राष्ट्र के लिए समर्पित मन को नहीं।”
उन्होंने केरल में वामपंथी हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी महिलाओं को वहां सबसे ज्यादा अत्याचार झेलना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को राष्ट्र की प्रगति के लिए बेहद जरूरी बताया।
महिला सशक्तीकरण पर जोर
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि एक सशक्त महिला ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करती है। शशिकला वंजारी ने कहा कि बदलते भारत में महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी है।
वहीं रजनी अब्बी ने बताया कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकार महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।
विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में संविधान निर्माण में महिलाओं के योगदान और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही समतामूलक और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है।