ट्रम्प का बड़ा ऐलान: दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, भारत पर घटकर 10% हुआ टैरिफ
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वॉशिंगटन – अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ आदेश को रद्द किए जाने के कुछ ही घंटों बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर 10% नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का आदेश जारी कर दिया है। यह टैरिफ 24 फरवरी से लागू होगा। इस फैसले का असर भारत समेत कई देशों के व्यापार पर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रम्प की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा था कि टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि अमेरिकी संसद को है। कोर्ट ने ट्रम्प के पुराने ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था।
इसके बाद ट्रम्प ने अदालत के फैसले की कड़ी आलोचना की और जजों पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला अमेरिका के हितों के खिलाफ है।
भारत समेत कई देशों पर 10% टैरिफ
BBC और व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय यूनियन जैसे व्यापार समझौते वाले देशों को भी अब 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। पहले भारत पर 18% टैरिफ लागू था, जो अब घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया।
सेक्शन 122 के तहत टैरिफ लागू करने की योजना
ट्रम्प प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत टैरिफ लागू करेगा। यह कानून राष्ट्रपति को आर्थिक संकट या व्यापार घाटे की स्थिति में अस्थायी टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, जो आमतौर पर 150 दिनों तक लागू रह सकता है।
कुछ उत्पादों को दी गई छूट
नई नीति के तहत कुछ कृषि उत्पाद, महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और यात्री वाहन जैसे उत्पादों को टैरिफ से छूट दी गई है।
ऐतिहासिक संदर्भ और कानूनी विवाद
1971 में राष्ट्रपति निक्सन ने भी वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। हालांकि, सेक्शन 122 का अब तक कभी इस्तेमाल नहीं हुआ था, इसलिए इसके कानूनी भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रम्प के पुराने टैरिफ को लेकर 12 अमेरिकी राज्यों और व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था, जिसके बाद अदालतों ने इसे गैरकानूनी करार दिया था।
वैश्विक व्यापार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ा सकता है, हालांकि भारत जैसे देशों के लिए टैरिफ कम होने से कुछ राहत मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस फैसले के खिलाफ कानूनी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है।