सावधान: अश्लील विडियो देखने का डर दिखाकर साइबर अपराधियों का नया हथकंडा
- सोशल मीडिया के माध्यम से महिला और पुरुषों को ब्लैकमेल का खेल, साइबर पुलिस अलर्ट
नई तकनीकी (एआई) के दौर में अब साइबर ठग भी स्मार्ट तरीके से ठगी का हथकंडा अपनाने लगे हैं। इन दिनों ठग सीनियर सिटिजन और अन्य लोगों के मोबाइल पर अश्लील विडियो देखने और शेयर करने का आरोप लगाकर झांसे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर पोस्ट किए फोटो, विडियो को एडिट कर वायरल करने की धमकी देते हैं। साइबर थाने में हर महीने पांच से छह केस सामने आ रहे हैं। वहीं पुलिस लोगों को जागरुक करने के लिए आरडब्ल्यूए, एओए के वॉट्सऐप ग्रुप और अभियान का मदद ले रही है। लोगों को इन ठगी की तरीके के बारे में जानकारी दी जाती है और बचने के लिए सतर्क करने की हिदायत भी दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें साइबर ठग खुद को पुलिस अधिकारी, साइबर सेल कर्मी या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। ठग सबसे पहले सामान्य फोन कॉल करते हैं। कॉल रिसीव करते ही सामने वाला व्यक्ति खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताता है। इसके बाद वह पीड़ित को कहता है कि उसके मोबाइल या कंप्यूटर से अश्लील विडियो देखे गए हैं। कई मामलों में यह भी कहा जाता है कि इन विडियो को अन्य लोगों को फॉरवर्ड किया गया है, जो एक गंभीर अपराध है। साथ ही बताया जाता है कि आपने बच्चों की विडियो देखे हैं। जिस पर कानूनी कार्रवाई होगी और ठग दावा करते हैं कि पीड़ित के खिलाफ शिकायत दर्ज हो चुकी है। कई बार फर्जी एफआईआर, नोटिस, गिरफ्तारी वारंट या जांच से जुड़े दस्तावेज भी वॉट्सऐप पर भेज दिए जाते हैं। इन दस्तावेजों पर पुलिस, सीबीआई, साइबर सेल या अदालत जैसी संस्थाओं के नाम और लोगो लगाए जाते हैं, जिससे लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं।
विडियो कॉल पर जांच नहीं करती पुलिस
पुलिस का कहना है कि ठग लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। वे कहते हैं कि अगर मामला तुरंत निपटाना है तो जांच शुल्क, वेरिफिकेशन फीस या जुर्माने के नाम पर रकम जमा करनी होगी। कई लोग बदनामी और कानूनी कार्रवाई के डर से उनकी बातों में आकर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी फोन करके पैसे जमा कराने के लिए नहीं कहती। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला दर्ज होता है तो उसकी प्रक्रिया निर्धारित कानूनी तरीके से की जाती है। फोन या विडियो कॉल पर दबाव बनाकर पैसे मांगना साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।
सोशल मीडिया के अकाउंट को हैक करते ब्लैकमेल
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इन दिनों साइबर अपराधी महिलाओं को टारगेट कर उनके साथ ठगी कर रहे हैं। पीड़ियों को मैसेज कर कहा जाता है कि तुम्हारे कुछ फोटो और विडियो उनके पास हैं। उसे वायरल करने की धमकी देते हैं। बदले में पीड़िताओं से रुपये की मांग की जाती है। कई बार जाल में फंसी महिलाएं ठगों के कहने रुपये ट्रांसफर कर देती हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि तुरंत 1930 पर कॉल कर जानकारी दे। साथ ही एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही थाने के साइबर हेल्प डेस्क और नोएडा सेक्टर 36 साइबर थाने में सूचना दे सकते हैं। पुलिस तुरंत मदद करेगी।