‘पहले की सरकारों को कुर्सी जाने का डर था, रिस्क तो लेना ही होगा’— युवाओं से पीएम मोदी का संदेश

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स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे, एंटरप्रेन्योर और स्टेकहोल्डर्स को पीएम मोदी का संबोधन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया अभियान के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार, 16 जनवरी को देशभर के एंटरप्रेन्योर, इनोवेटर्स और स्टेकहोल्डर्स को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पिछले एक दशक में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में आए ऐतिहासिक बदलावों पर विस्तार से चर्चा की और युवाओं से जोखिम उठाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नए विचारों और जोखिम लेने की मानसिकता से जन्मी एक क्रांति है, जिसने भारत को वैश्विक नवाचार मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।

‘रिस्क लेना मेरी भी आदत है’

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा,
“मैं हमेशा रिस्क-टेकिंग पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि यह मेरी भी पुरानी आदत है। जो काम कोई करने को तैयार नहीं होता, जिन्हें दशकों तक पहले की सरकारों ने नहीं छुआ, क्योंकि उन्हें चुनाव हारने और कुर्सी जाने का डर था— उन कार्यों को मैं अपना दायित्व समझकर करता हूं।”

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देशहित में बड़े फैसले लेने के लिए जोखिम उठाना जरूरी होता है।

‘किसी को तो Risk लेना ही होगा’

प्रधानमंत्री ने कहा,
“जो काम देश के लिए जरूरी है, वो काम किसी न किसी को तो करना ही होगा। किसी को तो Risk लेना ही होगा। नुकसान होगा तो मेरा होगा, लेकिन अगर फायदा होगा तो मेरे देशवासियों को मिलेगा।”

पीएम मोदी के इस बयान को युवाओं और उद्यमियों के लिए एक मजबूत प्रेरणादायक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

स्टार्टअप इंडिया बना राष्ट्रव्यापी आंदोलन

प्रधानमंत्री ने बताया कि एक दशक पहले भारत में स्टार्टअप्स की संख्या बेहद सीमित थी और नवाचार के अवसर भी कम थे। लेकिन आज स्टार्टअप इंडिया एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है।

उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि
10 साल पहले भारत में करीब 500 स्टार्टअप्स थे, जो आज बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गए हैं। यह बदलाव भारत की युवा शक्ति, नीति सुधारों और उद्यमिता के प्रति बदलती सोच का परिणाम है।

नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला भारत

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 16 जनवरी 2016 को की गई थी। इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, उद्यमिता को मजबूत करना और निवेश आधारित विकास को सक्षम बनाना था, ताकि भारत नौकरी चाहने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला देश बन सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम और अधिक मजबूत होगा और वैश्विक स्तर पर देश की आर्थिक ताकत को नई पहचान देगा

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