महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

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Supreme Court of India ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अफसरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें स्थायी कमीशन (Permanent Commission) से वंचित करना भेदभाव था। अब जिन महिला अफसरों को स्थायी कमीशन नहीं मिला, उन्हें भी पेंशन का लाभ दिया जाएगा, भले ही उनकी सेवा पहले समाप्त हो चुकी हो।

 कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुईयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि:

  • महिलाओं को अवसर न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की खामी थी

  • ACR (परफॉर्मेंस रिपोर्ट) में पूर्वाग्रह के संकेत मिले

  • महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग और अवसर नहीं दिए गए

  • यह संविधान के समानता के अधिकार के खिलाफ है

 महिला अफसरों को मिली 3 बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में तीन अहम निर्देश दिए गए:

  • जिन महिला अफसरों को पहले ही स्थायी कमीशन मिल चुका है, उनका स्टेटस यथावत रहेगा

  • जो अफसर सेवा से बाहर हो चुकी हैं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी (बिना एरियर)

  • वर्तमान में कार्यरत महिला अफसरों को 60% कटऑफ पूरा करने पर स्थायी कमीशन मिलेगा

 अलग-अलग सेनाओं पर कोर्ट की टिप्पणी

आर्मी:

  • ACR में पूर्वाग्रह पाया गया

  • महिलाओं को करियर ग्रोथ के अवसर कम मिले

नेवी:

  • मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी

  • ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ को सही माना गया

एयर फोर्स:

  • प्रदर्शन मानदंड जल्दबाजी में लागू

  • मूल्यांकन प्रक्रिया में खामियां

 लंबे संघर्ष के बाद मिला अधिकार

यह मामला 2003 में शुरू हुआ, जब महिला अफसरों ने स्थायी कमीशन की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन 2019 की सरकारी नीति में सीमाएं जोड़ दी गईं, जिससे कई महिला अफसर वंचित रह गईं। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब यह ऐतिहासिक फैसला आया।

 सेना में महिलाओं की वर्तमान स्थिति
  • थलसेना: सीमित शाखाओं में ही अवसर, कॉम्बैट रोल अब भी सीमित

  • वायुसेना: महिलाएं फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर उड़ा रही हैं

  • नौसेना: लॉजिस्टिक्स, पायलट और अन्य तकनीकी भूमिकाओं में अवसर

 क्या है फैसले का महत्व?

यह निर्णय न केवल महिला अफसरों के अधिकारों की बहाली है, बल्कि सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में महिलाओं को बेहतर अवसर और सम्मान मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

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