“मेरी सरकार को सुधार के नाम पर हटाया गया”: शेख हसीना का बड़ा खुलासा, बोलीं ‘बांग्लादेश की आत्मा के लिए लड़ाई जारी है’
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने तख्तापलट के बाद पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। एक न्यूज चैनल से विशेष बातचीत में हसीना ने कहा कि उन्हें एक “सुनियोजित साजिश” के तहत सत्ता से हटाया गया, जिसे “सुधार आंदोलन” का नाम दिया गया था।हसीना ने इस बातचीत में कहा कि यह पूरा घटनाक्रम एक “संगठित सैन्य और राजनीतिक षड्यंत्र” था, जिसमें कट्टरपंथी गुटों ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि देश में बढ़ती चरमपंथी विचारधारा लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “जो कुछ हुआ, वह सुधार नहीं था, यह एक योजनाबद्ध तख्तापलट था। कट्टरपंथी ताकतें और कुछ विदेशी हित इसमें शामिल थे। वे बांग्लादेश को पीछे ले जाना चाहते हैं।”
हसीना ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत से शरण और समझदारी भरा सहयोग मिला है। उन्होंने भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कठिन समय में उनका “सबसे विश्वसनीय मित्र” साबित हुआ है। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि पश्चिमी देशों का उनकी सत्ता से बेदखली में कोई सीधा हाथ था। “मेरे खिलाफ अभियान चलाने वाले अब यह कहानी गढ़ रहे हैं कि मुझे पश्चिमी ताकतों ने हटाया। यह सच नहीं है,” उन्होंने कहा। हसीना ने यह भी बताया कि बांग्लादेश की सेना के सामने उस समय गहरी दुविधा थी। कुछ अधिकारी सुधार के नाम पर शामिल हुए, लेकिन कई लोकतंत्र समर्थक अधिकारियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। “मैंने लोकतंत्र के लिए अपनी ज़िंदगी समर्पित की है। मैं जल्द ही बांग्लादेश लौटूंगी और जनता के साथ मिलकर लोकतांत्रिक सरकार की बहाली के लिए लड़ाई जारी रखूंगी।” इस बीच, बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर हसीना ने आरोप लगाया कि वह देश को “कट्टरपंथियों और विदेशी प्रभाव” के हवाले कर रहे हैं। शेख हसीना का यह इंटरव्यू बांग्लादेश की राजनीति में नया भूचाल ला सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान देश के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्ता संतुलन को हिला सकता है।