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दिल्ली ब्लास्ट की साजिश का अड्डा बना अल-फलाह यूनिवर्सिटी का हॉस्टल रूम नंबर 13

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दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बिल्डिंग नंबर 17 के रूम नंबर 13 को इस आतंकी साजिश का गुप्त ठिकाना (सीक्रेट मीटिंग पॉइंट) बनाया गया था। यह साधारण-सा, नमी भरा और पुराना हॉस्टल कमरा अब देश की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है। जांच में सामने आया है कि इसी कमरे में ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ से जुड़े डॉक्टर बैठकों का आयोजन करते थे और दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश में श्रृंखलाबद्ध आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे। इस यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टर अब गिरफ्त में हैं। जांच में पता चला है कि डॉ. उमर नबी, जिसने 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए कार ब्लास्ट को अंजाम दिया, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल में कार्यरत था। इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी।

जांच एजेंसियों ने बताया कि धमाके से एक दिन पहले डॉ. मुअज्ज़मिल शकील के किराए के मकान से 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री (IED बनाने का सामान) बरामद किया गया था। वह भी इसी यूनिवर्सिटी में काम करता था। इसके अलावा, डॉ. शहीन शाहिद, जो कथित तौर पर पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की “महिला इकाई” खड़ी करने की जिम्मेदारी संभाल रही थी, उसे भी गिरफ्तार किया गया है। उमर नबी धमाके में मारा गया, जबकि डॉ. निसार-उल-हसन, जो कश्मीर का रहने वाला है और यूनिवर्सिटी में ही पढ़ा रहा था, अब लापता बताया जा रहा है।

जांच एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी परिसर को सील कर दिया है और कई कर्मचारियों से पूछताछ चल रही है। बताया जा रहा है कि इन डॉक्टरों ने अकादमिक पेशे की आड़ में आतंक का जाल फैलाने की कोशिश की थी। एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने कहा, “यह अब तक का सबसे खतरनाक आतंकी मॉड्यूल है, जिसमें शिक्षित पेशेवर शामिल थे। उन्होंने विश्वविद्यालय को ढाल बनाकर काम किया।” अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बयान जारी कर कहा है कि वह पूरी तरह से जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है।

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