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कानपुर में फ्लोर मिल पर छापा, दूसरे ब्रांड का आटा अपने नाम से बेचने का खुलासा।

कानपुर में फ्लोर मिल पर छापा, दूसरे ब्रांड का आटा अपने नाम से बेचने का खुलासा।

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कानपुर में खाद्य पदार्थों में मिलावट और भ्रामक पैकेजिंग के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। रामादेवी स्थित एक फ्लोर मिल पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने ऐसी अनियमितताएं पकड़ीं, जिनसे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। जांच में सामने आया कि दूसरे ब्रांड के तैयार आटे को खोलकर उसे अपने ब्रांड के नाम से दोबारा पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था। इसके अलावा गेहूं के आटे में चावल के आटे की मिलावट किए जाने की भी आशंका व्यक्त की गई है। विभाग ने मौके से करीब 1.50 लाख रुपये का स्टॉक सीज कर दिया है और पांच नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।

जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर मिलावटखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह के निर्देशन में एफएसडीए की टीम ने गांधीग्राम, रामादेवी स्थित मेसर्स दर्शन ट्रेडिंग कंपनी (फ्लोर मिल) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उत्पादन, पैकेजिंग, दस्तावेजों और भंडारण व्यवस्था की गहन जांच की।

दूसरे ब्रांड का आटा दोबारा पैक करने का मामला

जांच के दौरान टीम ने पाया कि अन्य जिलों में निर्मित विभिन्न ब्रांडों के आटे के पैकेट खोले जा रहे थे और उसी आटे को दर्शन ट्रेडिंग कंपनी के नाम से नए पैकेटों में भरकर बाजार में भेजा जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार की री-पैकेजिंग से उपभोक्ताओं को वास्तविक उत्पाद और निर्माता की जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होने की आशंका रहती है।

पैकेटों पर नहीं थी जरूरी जानकारी

एफएसडीए की जांच में यह भी सामने आया कि कई पैकेटों पर बैच नंबर, पैकेजिंग तिथि और एक्सपायरी तिथि जैसी अनिवार्य जानकारियां दर्ज नहीं थीं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी पैक्ड खाद्य उत्पाद पर यह जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होना आवश्यक है, ताकि उपभोक्ता उत्पाद की गुणवत्ता और वैधता की जानकारी प्राप्त कर सके।

स्वच्छता और दस्तावेजों में भी मिली कमियां

निरीक्षण के दौरान फ्लोर मिल की स्वच्छता व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई।इसके अलावा टीम को कर्मचारियों के मेडिकल रिकॉर्ड, खाद्य लाइसेंस और खरीद-बिक्री से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके। अधिकारियों ने इन कमियों को भी गंभीर अनियमितता माना है।

चावल के आटे की मिलावट की आशंका

छापेमारी के दौरान परिसर से—

  • लगभग 3000 किलोग्राम श्री भोग ब्रांड आटा
  • आटा चक्की फ्रेश ब्रांड के पैक
  • 100 किलोग्राम दर्शन ब्रांड आटा
  • 200 किलोग्राम चावल का आटा

बरामद किया गया।

एफएसडीए के अनुसार मौके पर मिले चावल के आटे को देखते हुए आशंका है कि इसका उपयोग गेहूं के आटे में मिलावट के लिए किया जा सकता था। हालांकि, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

पांच नमूने जांच के लिए भेजे गए

खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके से गेहूं के आटे के चार नमूने तथा एक अपमिश्रक (संभावित मिलावट सामग्री) का नमूना एकत्र किया है। इन सभी नमूनों को जांच के लिए खाद्य विश्लेषक की प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

1.50 लाख रुपये का स्टॉक किया गया सीज

निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं को देखते हुए विभाग ने संबंधित स्टॉक को सीज कर दिया। जब्त किए गए उत्पादों का अनुमानित मूल्य करीब 1.50 लाख रुपये बताया गया है। जांच पूरी होने तक इस स्टॉक का उपयोग या बिक्री नहीं की जा सकेगी।

रिपोर्ट के बाद होगी कानूनी कार्रवाई

सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह ने बताया कि मिलावट और भ्रामक पैकेजिंग की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिलने के बाद यदि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मिलावट के खिलाफ अभियान रहेगा जारी

एफएसडीए ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। विभाग का विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा और मिलावट, गलत ब्रांडिंग, भ्रामक पैकेजिंग तथा खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं संदिग्ध खाद्य पदार्थों का निर्माण या बिक्री होती दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके

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