इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा: 21 घंटे की मैराथन बातचीत भी नहीं तोड़ सकी अमेरिका-ईरान गतिरोध

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Mediawali news

Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन बातचीत में दर्जनों फोन कॉल्स, बैक-चैनल डिप्लोमेसी और कई स्तरों पर प्रयास किए गए, लेकिन दोनों देशों के बीच जमे गहरे मतभेद दूर नहीं हो सके।

सूत्रों के मुताबिक, वार्ता के दौरान माहौल कई बार सकारात्मक दिखा, लेकिन हर बार कोई न कोई बड़ा मुद्दा आड़े आ गया। खासतौर पर अमेरिका की ओर से अपनाई गई ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति ने बातचीत को और जटिल बना दिया। यह नीति पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल से ही ईरान के खिलाफ सख्त रुख का प्रतीक रही है, जिसका असर अब भी कूटनीतिक प्रयासों पर साफ नजर आ रहा है।

ईरान की मांग रही कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ठोस और तत्काल राहत दी जाए, जबकि अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाए। इसी खींचतान ने वार्ता को आगे बढ़ने से रोक दिया।

इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा था, खासकर उस समय जब West Asia पहले से ही तनाव और संघर्ष की स्थिति से गुजर रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर यह वार्ता सफल होती, तो पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती थी।

हालांकि, बातचीत के असफल रहने के बावजूद कूटनीतिक चैनल पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में बातचीत के दरवाजे खुले रहेंगे और आगे किसी नई पहल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस वार्ता की विफलता यह दिखाती है कि केवल कड़े रुख या दबाव की रणनीति से जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का समाधान निकालना आसान नहीं होता। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका अपने रुख में नरमी लाता है या ईरान कोई नई रणनीति अपनाता है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया फिर से पटरी पर आ सके।

Anjali Priya
Anjali Priya
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