फ्लॉवर शो 2026 में पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लोगों को सिखाई गई बागवानी की कला

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स्वच्छ पर्यावरण के लिए जागरूकता अभियान

नोएडा सेक्टर-33A में आयोजित फ्लॉवर शो 2026 में ‘गिव मी ट्रीज ट्रस्ट’ ने अपने स्टॉल के जरिए स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया। संस्था ने लोगों को बागवानी के साथ-साथ वाटर मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और नर्सरी मैनेजमेंट के महत्व के बारे में जागरूक किया। स्टॉल पर पहुंचे लोगों को पौधे लगाने, उनकी देखभाल और घरेलू स्तर पर हरियाली बढ़ाने के तरीके भी बताए गए।

हॉबी क्लब से राष्ट्रीय स्तर की संस्था तक का सफर

संस्था के सदस्य विनीत वोहरा (हेड ऑफ कम्युनिटी इंगेजमेंट एंड नेचर एजुकेशन प्रोग्राम/आरसीएसआर) ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 1977 में स्वामी प्रेम प्रवर्तन (पीपल बाबा) ने एक हॉबी क्लब के रूप में की थी। वर्ष 2011 में इसे ट्रस्ट का रूप देकर आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया। संस्था स्कूल, कॉलेज, सोसायटी, कॉर्पोरेट संस्थानों और किरण बेदी के निर्देशन में जेलों में भी पर्यावरण कार्यक्रम चला चुकी है।

पौधों की देखरेख और तितली उपवन की पहल

गिव मी ट्रीज ट्रस्ट सिर्फ पौधे नहीं लगाता, बल्कि 3 से 5 साल तक उनकी देखरेख भी करता है। संस्था लोगों को बगीचे तैयार करने में मदद करती है और मिट्टी, उर्वरक तथा पौधों की देखभाल की पूरी जानकारी देती है। इसके साथ ही छोटे-छोटे तितली उपवन (बटरफ्लाई गार्डन) भी विकसित कराए जाते हैं, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।

ऑक्सीजन कार से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

विनीत वोहरा ने बताया कि संस्था की गाड़ी को ‘ऑक्सीजन कार’ कहा जाता है, क्योंकि इससे पौधों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। यह कार लोगों को पेड़-पौधों और जंगलों के महत्व का संदेश देने का एक प्रतीक भी है।

देशभर में फैला अभियान और प्रमुख कार्य

ट्रस्ट अब तक 21 राज्यों के 226 जिलों में 18,600 से अधिक स्वयंसेवकों के साथ काम कर चुका है। नोएडा सेक्टर-115 स्थित उदय उपवन में सफलतापूर्वक बागान तैयार किया गया है। संस्था वाटर मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और नर्सरी मैनेजमेंट पर नियमित कार्यक्रम चलाती है। इसके तहत पॉलिथीन के पुनः उपयोग और फल-सब्जी के छिलकों से कंपोस्ट बनाने जैसे उपायों का प्रचार किया जाता है।

नेचर एजुकेशन प्रोग्राम और जन सहभागिता

नेचर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की गई। संस्था का कहना है कि वर्तमान पीढ़ी अंतिम ऐसी पीढ़ी है, जो पूर्वजों के अनुभवों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकती है। ट्रस्ट ने अधिक से अधिक लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।

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