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एयर प्यूरीफायर पर GST घटाने की मांग का केंद्र ने किया विरोध

नई दिल्ली: एयर प्यूरीफायर पर GST घटाने की मांग को लेकर दायर याचिका का केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है। सरकार ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर GST काउंसिल की कोई आपात बैठक नहीं बुलाई गई है और न ही फिलहाल टैक्स दरों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, केंद्र ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।

GST दरों का फैसला अदालत नहीं कर सकती: केंद्र

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि GST दरों में बदलाव का अधिकार पूरी तरह GST काउंसिल के पास है, न कि न्यायालय के। सरकार ने कहा कि किसी भी उत्पाद पर टैक्स घटाने या बढ़ाने का फैसला व्यापक आर्थिक स्थिति, राजस्व प्रभाव और अन्य नीतिगत पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।
केंद्र का कहना था कि केवल किसी एक याचिका या अदालत के निर्देश के आधार पर GST दरों में बदलाव नहीं किया जा सकता।

याचिका में क्या दी गई है दलील

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि दिल्ली और NCR जैसे गंभीर रूप से प्रदूषित इलाकों में एयर प्यूरीफायर अब लग्ज़री आइटम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरत बन चुके हैं। याचिका में कहा गया कि ऊंची GST दर के कारण आम लोगों के लिए एयर प्यूरीफायर खरीदना मुश्किल हो जाता है, जबकि प्रदूषण सीधे लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है।
इसी आधार पर एयर प्यूरीफायर पर GST घटाने की मांग की गई थी।

सरकार ने क्यों जताई आपत्ति

केंद्र सरकार ने जवाब में कहा कि अगर हर उत्पाद को “ज़रूरी” बताकर टैक्स में छूट की मांग की जाने लगे, तो इससे पूरे GST ढांचे पर असर पड़ेगा। सरकार ने यह भी बताया कि पहले से ही कई आवश्यक वस्तुओं पर कम GST दर या पूरी छूट दी जा रही है।
सरकार के मुताबिक, एयर प्यूरीफायर पर टैक्स को लेकर फिलहाल GST काउंसिल के समक्ष कोई तात्कालिक प्रस्ताव नहीं रखा गया है।

याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल

केंद्र ने अदालत में यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की मंशा स्पष्ट नहीं है और यह याचिका नीति से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है, जो उचित नहीं है। सरकार ने अदालत से आग्रह किया कि वह कर नीति जैसे मामलों में हस्तक्षेप न करे।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। यह मामला अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य, पर्यावरण और कर नीति से जुड़े बड़े सवाल सामने आते हैं। अब सभी की नजरें अदालत के अगले रुख पर टिकी हैं।

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