ईरान‑अमेरिका तनाव: भारत पर असर, मोदी ने कहा ‘संवाद और कूटनीति’
Mediawali news, Delhi
ईरान-अमेरिका तनाव से वैश्विक असर
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में लगभग 90 लाख भारतीय नागरिक निवास और कार्य करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करना भारत सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठकें की हैं। इन बैठकों में राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करता, बल्कि शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन करता है।
उन्होंने सभी संबंधित देशों से अपील की कि वे तनाव बढ़ाने के बजाय कूटनीति और बातचीत का रास्ता अपनाएं। साथ ही संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए हर संभव कदम उठाएं।
विदेश मंत्रालय की सक्रियता
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और इजरायल के अधिकारियों से संपर्क कर संयम बरतने की अपील की है। भारतीय दूतावासों के माध्यम से वहां मौजूद नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि इस संकट का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार है।