दुग्धशाला विकास विभाग के स्वर्ण जयंती समारोह में किसानों को आधुनिक डेयरी और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली।
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उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गौतमबुद्धनगर के विकास भवन सभागार में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस संयुक्त कार्यक्रम में दुग्धशाला विकास विभाग और पशुपालन विभाग ने किसानों, पशुपालकों तथा स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य और सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विभाग की 50 वर्षों की उपलब्धियों का जश्न मनाना नहीं था, बल्कि किसानों को बदलते समय के अनुरूप वैज्ञानिक पशुपालन अपनाने और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित करना भी था। बड़ी संख्या में किसानों और पशुपालकों ने कार्यक्रम में भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के लाभार्थियों को मिले चयन पत्र
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 की ई-लॉटरी में चयनित लाभार्थियों को मुख्य विकास अधिकारी द्वारा चयन पत्र एवं अनुमति पत्र वितरित किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह योजना प्रदेश में स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चयनित लाभार्थियों ने भी योजना को डेयरी व्यवसाय के विस्तार के लिए उपयोगी बताया।
50 वर्षों की विकास यात्रा दिखाई गई
स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान दुग्ध आयुक्त धन लक्ष्मी ने लखनऊ मुख्यालय से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने विभाग की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर जूम लिंक के माध्यम से उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग की 50 वर्षों की विकास यात्रा तथा पशु रोग नियंत्रण और टीकाकरण से संबंधित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इन प्रस्तुतियों के जरिए प्रतिभागियों को विभाग की प्रगति और आधुनिक पशुपालन की दिशा में हुए बदलावों की जानकारी दी गई।
वैज्ञानिक पशुपालन पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण कुमार सचान, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र डॉ. विपिन कुमार तथा वैज्ञानिक डॉ. कुमार घनश्याम ने किसानों को पशुपालन के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराया।
विशेषज्ञों ने बताया कि यदि पशुओं को संतुलित आहार, स्वच्छ वातावरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर टीकाकरण उपलब्ध कराया जाए, तो दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने चारा प्रबंधन, पशुओं की देखभाल और रोगों की रोकथाम के आधुनिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की।
कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड की जानकारी
कार्यक्रम में नाबार्ड की जिला विकास अधिकारी अलका और एलडीएम ने किसानों को कृषि ऋण, डेयरी वित्तपोषण और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं के साथ बैंकिंग सहायता का सही उपयोग कर किसान अपने डेयरी व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं और आधुनिक उपकरणों व बेहतर नस्ल के पशुओं में निवेश कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
दुग्ध विकास विभाग की योजनाओं पर हुआ विस्तार से मार्गदर्शन
वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक अनिल कुमार शर्मा ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए पात्र किसानों से उनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और योजनाओं के उद्देश्यों को सरल भाषा में समझाया, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक इनका लाभ प्राप्त कर सकें।
मुख्य विकास अधिकारी ने किया आत्मनिर्भर बनने का आह्वान
मुख्य विकास अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नई योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, वैज्ञानिक पशुपालन करें और सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को लाभकारी एवं आत्मनिर्भर बनाएं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रत्येक पात्र किसान तक सरकारी सहायता पहुंच सके।
ज्ञान, तकनीक और योजनाओं का संगम बना कार्यक्रम
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक अनिल कुमार शर्मा ने किया। समापन अवसर पर उन्होंने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन केवल स्वर्ण जयंती समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों और पशुपालकों के लिए सीखने, आधुनिक तकनीकों को समझने और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का प्रभावी मंच साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक पशुपालन, समय पर टीकाकरण, बेहतर चारा प्रबंधन और आधुनिक डेयरी तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।