बिहार में 5 राज्यसभा सीटों पर चुनाव, विधायकों के वोट से तय होगी नई तस्वीर
Mediawali news
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पटना में सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में लगातार बैठकों और रणनीति का दौर चल रहा है। इस चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी राज्यसभा जाने की चर्चा है, इसलिए यह मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
राज्यसभा चुनाव आम चुनावों से अलग होते हैं। यहां जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक राज्यसभा सांसदों का चुनाव करते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा सदस्यों का चुनाव ‘सिंगल ट्रांसफरेबल वोट’ यानी एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है। इसमें विधायक एक ही वोट देते हैं, लेकिन मतपत्र पर उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में नंबर देकर प्राथमिकता तय करते हैं।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए सबसे ज्यादा वोट नहीं, बल्कि एक तय ‘कोटा’ हासिल करना जरूरी होता है। यह कोटा एक गणितीय फार्मूले से तय किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, कुल विधायकों की संख्या को खाली सीटों की संख्या में एक जोड़कर भाग दिया जाता है और फिर उसमें एक जोड़ दिया जाता है। बिहार में इस हिसाब से एक सीट जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
इस चुनाव में एक खास नियम ‘ओपन बैलेट’ सिस्टम भी लागू होता है। इसके तहत किसी भी पार्टी के विधायक को अपना मत डालने से पहले अपने दल के अधिकृत एजेंट को मतपत्र दिखाना होता है। अगर विधायक ऐसा नहीं करता, तो उसका वोट रद्द हो सकता है। हालांकि, निर्दलीय विधायकों को यह मतपत्र दिखाने की बाध्यता नहीं होती।
बिहार में कुल 16 राज्यसभा सीटें हैं, जिनमें से इस बार पांच सीटों पर चुनाव हो रहा है। जानकारी के अनुसार एनडीए को पांचवीं सीट जीतने के लिए तीन विधायकों की जरूरत है, जबकि महागठबंधन को छह विधायकों का समर्थन चाहिए। एआईएमआईएम के पांच और बीएसपी के एक विधायक इस मुकाबले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे में बिहार की पांचवीं सीट पर जीत किसकी होगी, यह विधायकों के समर्थन और रणनीति पर निर्भर करेगा। चुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।