बांग्लादेश में सुधार संकट: BNP ने यूनुस के संवैधानिक एजेंडे को किया ठप

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ढाका:
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की देश की शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव की योजना फिलहाल अधर में लटक गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सांसदों ने संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर शपथ लेने से इनकार कर दिया है, जिससे प्रस्तावित सुधार प्रक्रिया पर संकट खड़ा हो गया है।

13वें संसदीय चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद बीएनपी के नए सांसदों ने मंगलवार को ढाका स्थित राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाजा में पद की शपथ ली। इसी के साथ पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ भी ली। यह कदम मोहम्मद यूनुस के सुधार एजेंडे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

संवैधानिक सुधार परिषद की शपथ से BNP ने बनाई दूरी

मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने मंगलवार सुबह संविधान के अनुसार सांसदों को शपथ दिलाई। 12वीं संसद के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पद खाली होने के कारण चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने ही शपथ ग्रहण कराई। कार्यक्रम का संचालन संसद सचिवालय की सचिव कनीज मौला ने किया।

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएनपी सांसदों ने संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान ने ढाका-17 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के तौर पर शपथ ली। समारोह में उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान भी मौजूद थीं।

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएनपी नेता सलाउद्दीन अहमद ने कहा कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के निर्देश पर सभी नए सांसदों को सुधार परिषद के फॉर्म पर हस्ताक्षर न करने का आदेश दिया गया, क्योंकि उन्हें परिषद का सदस्य नहीं चुना गया था।

अन्य दलों का रुख भी सख्त

बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) समेत 11 दलों के गठबंधन के सांसद भी सुधार परिषद की शपथ न लेने पर विचार कर रहे थे। हालांकि, जमात के चुने गए सांसदों को उसी स्थान पर शपथ दिलाई गई।
जमात नेताओं ने भी संकेत दिए हैं कि वे जुलाई चार्टर के तहत प्रस्तावित परिषद को स्वीकार नहीं करेंगे और अपने तरीके से काम करेंगे।

जुलाई चार्टर क्या है?

जुलाई चार्टर एक प्रस्तावित सुधार योजना है, जिसके तहत बांग्लादेश की शासन व्यवस्था में बड़े संवैधानिक बदलाव किए जाने थे।
इस योजना के तहत:

  • सभी सांसदों को पहले संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेनी थी

  • इसके बाद सुधार प्रक्रिया शुरू की जानी थी

हालांकि, बीएनपी द्वारा हस्ताक्षर न करने के बाद यह प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ गई है।

जुलाई चार्टर में प्रस्तावित बड़े बदलाव

यदि जुलाई चार्टर लागू होता, तो बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था में कई बड़े बदलाव होते, जैसे:

  • 100 सीटों वाला उच्च सदन (Upper House) बनाना

  • प्रधानमंत्री को लगातार दूसरे कार्यकाल से रोकना

  • प्रधानमंत्री द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति पर रोक

सत्ता संतुलन पर बढ़ा राजनीतिक टकराव

2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार और 30 राजनीतिक दलों ने मिलकर संवैधानिक, चुनावी और प्रशासनिक सुधारों की योजना पेश की थी। लेकिन अब बीएनपी के सत्ता में आने के बाद इस योजना पर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुधार परिषद को लेकर विवाद से बांग्लादेश की राजनीति में नई शक्ति संघर्ष की शुरुआत हो सकती है और देश में संवैधानिक सुधार प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।

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