बंगाल चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज, घुसपैठ और वोटर लिस्ट बना बड़ा मुद्दा
Mediawali news
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरम होता जा रहा है। चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान भले ही अभी बाकी हो, लेकिन राज्य की दो बड़ी पार्टियां भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस पहले से ही एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रही हैं। दोनों दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
इस बार चुनावी बहस में कई बड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति, राजनीतिक हिंसा और अवैध घुसपैठ को प्रमुख मुद्दा बना रही है। पार्टी का कहना है कि इन समस्याओं की वजह से राज्य में विकास की रफ्तार धीमी हो गई है और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। बीजेपी यह भी आरोप लगा रही है कि राज्य सरकार के कारण केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ आम लोगों तक ठीक तरह से नहीं पहुंच पा रहा है।
वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस केंद्र सरकार और बीजेपी पर पलटवार कर रही है। तृणमूल का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी इसे “वोट चोरी” की साजिश बता रही है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस अपनी सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बना रही है। पार्टी बंगाल की पहचान और सम्मान का मुद्दा उठाते हुए यह भी कह रही है कि केंद्र सरकार राज्य के साथ न्याय नहीं कर रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही देखने को मिलेगा। हालांकि वाम मोर्चा और कांग्रेस भी चुनावी मैदान में मौजूद रहेंगे और वे भी अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य की 294 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं और वह राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी थी। ऐसे में आने वाला चुनाव तृणमूल कांग्रेस के लिए सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगा, जबकि बीजेपी के लिए यह राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का बड़ा मौका माना जा रहा है।