बंगाल चुनाव परिणाम पर ममता बनर्जी का बड़ा हमला, बोलीं- “हम हारे नहीं, हराए गए हैं”

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Mediawali news
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस Tmc के खराब प्रदर्शन के बाद ममता ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से हराया गया है। 5 मई को मीडिया से बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग ने मिलकर चुनाव को प्रभावित किया। ममता ने कहा कि करीब 100 सीटें उनसे “छीन ली गईं” और लगभग 90 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।

“पूरी मशीनरी हमारे खिलाफ काम कर रही थी”

ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने पूरी सरकारी मशीनरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर प्रशासनिक हस्तक्षेप किया गया और कई अधिकारियों को बदल दिया गया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक सीधे दखल दे रहे थे। सभी IPS और IAS अधिकारियों को बदला गया। चुनाव आयोग ने एकतरफा काम किया और भाजपा के साथ मिलकर खेल खेला।” ममता ने दावा किया कि जब उनकी पार्टी अदालत पहुंची, तब लाखों वोटरों के नाम दोबारा सूची में जोड़े गए। उन्होंने इसे “गंदा और घटिया खेल” बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसा चुनाव पहले कभी नहीं देखा।

इंडी गठबंधन के नेताओं का मिला समर्थन

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद इंडी गठबंधन के कई बड़े नेताओं ने उनसे संपर्क किया और समर्थन जताया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल, शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें फोन किया। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन पूरी तरह उनके साथ खड़ा है और आने वाले समय में विपक्षी एकजुटता और मजबूत होगी। ममता ने बताया कि अखिलेश यादव उनसे मिलने आने वाले हैं और अन्य नेता भी जल्द मुलाकात करेंगे।

“अब मैं एक आजाद पंछी हूं”

अपने इस्तीफे की अटकलों को खारिज करते हुए ममता बनर्जी ने साफ कहा कि उनके इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि अब उनके पास कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए वह खुद को “एक आम आदमी” और “आजाद पंछी” मानती हैं। ममता ने कहा, “मैंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों की सेवा में लगा दी। मैंने 15 सालों में पेंशन का एक पैसा नहीं लिया और न ही वेतन लिया। अब मैं बिना किसी पद के भी जनता के लिए काम करती रहूंगी।”

ईवीएम और सुरक्षा बलों पर भी उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ईवीएम मशीनों को लेकर भी संदेह जताया। उन्होंने कहा कि मतदान के बाद भी कई मशीनों में बैटरी चार्ज 90-95 प्रतिशत कैसे बना रहा, जबकि सामान्य स्थिति में यह 40 प्रतिशत से नीचे होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कुछ मतदान केंद्रों में जाने से रोका गया और केंद्रीय बलों तथा चुनाव अधिकारियों ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया। ममता ने कहा कि उनके एजेंटों को पीटा गया और उन्हें खुद धक्का देकर बाहर निकाला गया।

आगे की रणनीति पर टिकी नजर

ममता बनर्जी के इन बयानों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि टीएमसी चुनाव परिणामों को लेकर कानूनी या राजनीतिक स्तर पर क्या कदम उठाती है और विपक्षी गठबंधन इस मुद्दे पर किस तरह की रणनीति अपनाता है।

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