बिल्हौर में पिकअप की टक्कर से पांच वर्षीय आकाश की मौत के बाद जबरन समझौते का आरोप, ब्लॉक प्रमुख ने कार्रवाई का भरोसा दिया
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कानपुर/बिल्हौर। अरौल थाना क्षेत्र के चंपतपुर गांव में दूध डेयरी के पास पिकअप की टक्कर से पांच वर्षीय मासूम आकाश की मौत के मामले में शुक्रवार को नया मोड़ सामने आया। शोक में डूबे परिवार से मिलने पहुंचीं ब्लॉक प्रमुख मनोरमा कठेरिया के सामने मृतक के माता-पिता ने पुलिस और कुछ प्रभावशाली लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद कार्रवाई की मांग करने पर उन पर दबाव बनाया गया और समझौता करने के लिए मजबूर किया गया।
घर के बाहर खेल रहा था पांच वर्षीय आकाश
चंपतपुर गांव निवासी कमलेश शर्मा का पांच वर्षीय बेटा आकाश बुधवार सुबह घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान गांव में रमेश सिंह की दूध डेयरी पर दूध लेने आई पिकअप को चालक पीछे की ओर कर रहा था। बताया गया कि पिकअप बैक करते समय मासूम उसकी चपेट में आ गया। वाहन की टक्कर से आकाश को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक पिकअप लेकर वहां से निकल गया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम के बाद शव रखकर किया प्रदर्शन
गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आकाश का शव गांव पहुंचा। इसके बाद परिजनों ने मुआवजे और कार्रवाई की मांग को लेकर शव सड़क पर रख दिया और हंगामा शुरू कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया। काफी बातचीत के बाद स्थिति शांत हुई। इसके बाद पिकअप संचालक स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। इसी दौरान आर्थिक सहयोग देने और आगे कार्रवाई न करने को लेकर लिखित समझौता होने की बात सामने आई। समझौते के बाद परिवार ने मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया।
माता-पिता ने लगाया दबाव बनाने का आरोप
शुक्रवार को ब्लॉक प्रमुख मनोरमा कठेरिया पीड़ित परिवार से मिलने चंपतपुर पहुंचीं। उन्होंने परिवार के लोगों से घटना की जानकारी ली और उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान मृतक के माता-पिता ने आरोप लगाया कि समझौता उनकी पूरी सहमति से नहीं हुआ था। उनका कहना है कि कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की ओर से उन पर दबाव बनाया गया। परिजनों के मुताबिक, उन्हें कार्रवाई करने पर गांव में न रहने देने तक की धमकी दी गई। इसी दबाव के चलते उन्होंने समझौते के कागज पर हस्ताक्षर कर दिए। परिवार का कहना है कि बेटे की मौत के बाद वे पहले ही सदमे में थे और ऐसे समय में उन पर समझौते के लिए दबाव बनाया गया।
कार्रवाई न होने पर भी जताई नाराजगी
मृतक के माता-पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि हादसे के बाद जिस तरह से मामले को आगे बढ़ाया जाना चाहिए था, उस तरह कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि मासूम की मौत के मामले में जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि उन्हें न्याय दिलाने के बजाय समझौते की ओर धकेला गया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में अभी कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। समझौता किन परिस्थितियों में हुआ और उसमें किसकी भूमिका थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
ब्लॉक प्रमुख ने दिया कार्रवाई का भरोसा
परिजनों की पूरी बात सुनने के बाद ब्लॉक प्रमुख मनोरमा कठेरिया ने उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि परिवार को किसी भी तरह के दबाव से डरने की जरूरत नहीं है। ब्लॉक प्रमुख ने संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने की बात भी कही। उनके हस्तक्षेप के बाद परिवार को उम्मीद जगी है कि हादसे के मामले में दोबारा पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
समझौते को लेकर उठे कई सवाल
मासूम की मौत के बाद हुए समझौते ने पूरे मामले को नए सवालों के बीच ला खड़ा किया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आर्थिक सहयोग और कार्रवाई नहीं करने का समझौता परिवार की स्वतंत्र सहमति से हुआ था या वास्तव में उन पर दबाव बनाया गया था। फिलहाल परिवार के आरोपों के बाद मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। अब सबकी नजर पुलिस और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे में जिम्मेदारी किसकी थी और समझौते की परिस्थितियां क्या थीं।