Share your love

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा-ए-मौत, बोलीं यह फैसला फर्जी, मैं डरने वाली नहीं

बांग्लादेश की स्पेशल ट्रिब्यूनल (एसटी) ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा-ए-मौत सुनाई है। हसीना पर आरोप है कि उन्होंने सेना प्रमुख रहे जनरल अजीज की हत्या की साजिश रची थी। उन्हें आइजीसी और बांग्लादेश मुकदमा आइटम नंबर 453 में मौत की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि सरकार ने मेरे खिलाफ झूठा केस बनवाया है। मैं डरने वाली नहीं हूं। फर्जी अदालत ने मेरे खिलाफ फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ फर्जी आवेदन दे कर मामले को कोर्ट में लाया गया है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री हसीना ने मीडिया को बताया कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मैं सच बोलती रहूंगी। भारत में 15 महीने से रह रहीं हसीना ने कहा कि मैं न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं। हसीना ने कोर्ट के फैसले को साजिश बताया है। वहीं ऑर्डर के बाद कोर्ट ने हसीना का घर ढहाने का आदेश दिया। ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद पुलिस ने हसीना के घर पर बुलडोजर चलाया और कई घंटे तक हिजबुत तहरीर संगठन के लीडरों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। भारत में 15 महीने से रह रहीं पूर्व पीएम हसीना ने कहा, मुझ पर झूठे आरोप लगाए, यूनुस सरकार ने मांगा प्रत्यर्पण मांगे हैं। भारत ने जवाब में कहा हम लोकतंत्र के साथ हैं। वहीं दक्षिण एशिया में पहली बार किसी महिला नेता को मौत की सजा सुनाई गई है

हसीना का प्रत्यर्पण करना भारत पर बाध्यकारी नहीं

बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। कई देशों ने कहा है कि हसीना को राजनीतिक कारणों से टारगेट किया गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार प्रत्यर्पण बाध्यकारी नहीं है। भारत ने कहा कि हम लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खड़े हैं। बांग्लादेश सरकार ने 2019 के प्रत्यर्पण समझौते का हवाला दिया है, लेकिन भारत के वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि राजनीतिक मामलों में भारत पर बाध्यता नहीं बनती।

यूनुस सरकार के फैसले को उनकी पार्टी पहले से टारगेटेड बता रही थी। कई देशों ने भी कहा कि कोर्ट में पहले से ही हसीना के खिलाफ माहौल बना दिया गया था। 1973 में बने कानून के तहत यह पहली बार है जब किसी महिला नेता को मौत की सजा सुनाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फैसले का उद्देश्य हसीना की पार्टी अवामी लीग को कमजोर करना है। हसीना के समर्थकों में बड़े पैमाने पर नाराजगी है और कई जिलों में प्रदर्शन भी हुए। कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं।

Anjali Priya
Anjali Priya
Articles: 59

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios
Work With Us