नोएडा श्रमिक आंदोलन: वेतन बढ़ा, साजिश के आरोप और जांच तेज
Mediawali news
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में शुरू हुआ श्रमिकों का आंदोलन अब बड़ा मुद्दा बन चुका है। सोमवार को यह प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया, जिससे प्रशासन और सरकार दोनों हरकत में आ गए। शुरुआत नोएडा के फेज-2 की एक कंपनी से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह कई कंपनियों और इलाकों में फैल गया।
कई जगहों पर कर्मचारियों ने कंपनियों को बंद कराया और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में मजदूर इकट्ठा हुए। पुलिस के अनुसार, करीब 83 स्थानों पर 42 हजार से ज्यादा कर्मचारी सड़कों पर उतरे थे। हालांकि ज्यादातर जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन दो स्थानों पर हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। अब तक 7 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर भीड़ को भड़का रहे थे, जिन्हें पहचान कर गिरफ्तार किया जा रहा है।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस आंदोलन के पीछे कोई संगठित समूह काम कर रहा हो सकता है। सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को उकसाने की कोशिश की गई। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भी कर्मचारियों को जोड़कर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया। अब पुलिस इन सबकी जांच कर रही है, खासकर यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि कहीं बाहर से फंडिंग तो नहीं हो रही।
इस बीच, मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक कमेटी बनाकर श्रमिकों की समस्याओं की जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने शुरुआती कदम के तौर पर मजदूरों के न्यूनतम वेतन में लगभग 21 प्रतिशत की अंतरिम बढ़ोतरी का ऐलान भी किया है।
मंगलवार को भी कुछ जगहों पर प्रदर्शन जारी रहा, लेकिन हालात पहले से शांत रहे। पुलिस की मौजूदगी में श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया।
अब यह मामला दो पहलुओं पर खड़ा है- एक तरफ मजदूर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन को शक है कि इस आंदोलन को किसी ने जानबूझकर भड़काया। आने वाले दिनों में जांच से ही साफ होगा कि यह सिर्फ मजदूरों का गुस्सा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है।