नोएडा की मिनी बस योजना ठप: 5 महीने डिपो में खड़ी रहीं बसें, अब दूसरे जिले भेजी गईं
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योजना बनी, संचालन नहीं हुआ
नोएडा के मोरना डिपो में पिछले पांच महीनों से खड़ी मिनी बसें आखिरकार शहर की सड़कों पर चलने से पहले ही बाहर भेज दी गई हैं। जिन बसों को शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों को जोड़ने के उद्देश्य से लाया गया था, वे अब हरदोई डिपो से संचालित होंगी। करीब आठ डीजल मिनी बसें नोएडा के लिए आवंटित की गई थीं, जिन्हें कम यात्री वाले रूटों और गांव-शहर कनेक्टिविटी के लिए चलाने की योजना थी। लेकिन न तो संचालन की तैयारी पूरी हो सकी और न ही रखरखाव के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया, जिससे बसें महीनों तक बेकार खड़ी रहीं।
प्रदूषण का तर्क और उठते सवाल
अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के चलते डीजल बसों का संचालन जनहित में उचित नहीं है। लेकिन सवाल यह उठता है कि बसों की खरीद और आवंटन के समय इस पहलू पर विचार क्यों नहीं किया गया। यदि प्रदूषण चिंता का विषय था, तो शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक या वैकल्पिक ईंधन वाली बसों की योजना क्यों नहीं बनाई गई।
डबल डेकर बसों का नया दावा
परिवहन विभाग के एआरएम रोहिताश कुमार के अनुसार, अब शहर में मुंबई की तर्ज पर डबल डेकर एसी बसें उतारने की तैयारी है। इन बसों से शहर के व्यस्त इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ऊंचे पेड़ और बिजली की तारों के कारण इनका संचालन मुश्किल होगा। फिलहाल इनके रूट तय करने की प्रक्रिया जारी है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर परिवहन सुविधा की उम्मीद लगाए लोगों को निराशा हाथ लगी है, क्योंकि जिस योजना से कनेक्टिविटी मजबूत होनी थी, वह बिना लागू हुए ही अधर में लटक गई।