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लाइव साइबर फ्रॉड पर नोएडा पुलिस की नजर, 122 पीड़ितों को समय रहते बचाया

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 जिले की साइबर टीम ने नवंबर 2025 से 20 फरवरी के बीच यह कार्रवाई की

नोएडा साइबर सुरक्षा पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर देशभर के 122 लोगों को लाइव ठगी के चंगुल से निकाला है। ये लोग शेयर ट्रेडिंग में ज्यादा मुनाफे के लालच में साइबर ठगों को लगातार पैसे ट्रांसफर कर रहे थे। पुलिस ने एनपीसीआई के जरिए पीड़ितों से सीधे संपर्क किया और उन्हें बताया कि वो ठगी का शिकार हो रहे हैं। चेतावनी मिलते ही सभी पीड़ितों ने आगे पैसा भेजना बंद कर दिया और संबंधित थानों में शिकायत दर्ज कराई।

साइबर सुरक्षा डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि साइबर पुलिस टीम ने इंटेलिजेंस के आधार पर काम किया। टीम ने साइबर और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर संदिग्ध लेनदेन और पैटर्न की जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि कई लोग सोशल मीडिया के जरिए फर्जी निवेश योजनाओं में फंस रहे हैं। ठग ऊंचे मुनाफे का लालच देकर लोगों से बड़ी रकम ट्रांसफर करा रहे थे। जांच में तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान समेत कई राज्यों के 122 पीड़ितों की पहचान हुई। ये लोग महीनों से ठगी के जाल में फंसे थे, लेकिन उन्हें इसका पता नहीं था। खास बात यह रही कि पुलिस ने शिकायत का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद लोगों से संपर्क कर सच्चाई बताई। इस पूरी कार्रवाई में डेटा विशेषज्ञ, वित्तीय इंटेलिजेंस और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय का बड़ा योगदान रहा। पुलिस ने संदिग्ध खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

ओडिशा के व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट से बचाया

जांच के दौरान टीम को पता चला कि ओडिशा का एक व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो चुका है। उसे फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले ठगों ने डराया और 41 लाख रुपये ठग लिए। साइबर टीम ने तुरंत उससे संपर्क किया। वह बेहद डरा हुआ था। टीम ने उसे समझाया कि यह फर्जीवाड़ा है, उसे कानूनी प्रक्रिया बताई और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। समय पर मार्गदर्शन मिलने से आगे की ठगी रुक गई।

 निवेश के जाल से बचा नोएडा का निवासी

इस दौरान नोएडा के एक व्यक्ति को फेसबुक पर एक आकर्षक निवेश योजना दिखाई दी। ऊंचे रिटर्न के लालच में उसने तीन लाख 48 हजार रुपये निवेश कर दिए।जैसे ही साइबर टीम को जानकारी मिली, तुरंत उस व्यक्ति से संपर्क किया गया। उसे बताया गया कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। टीम ने उसे आगे कोई रकम न भेजने की सलाह दी और पैसे वापस पाने के कानूनी विकल्प समझाए। समय पर चेतावनी से उसका और बड़ा नुकसान टल गया।

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